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संयुक्त राष्ट्र गाजा और इज़राइल के बीच युद्धविराम स्थापित करने और मानवाधिकारों को बहाल करने में विफल रहा: मुफ़्ती अब्दुल्लाह

भारत के राष्ट्रपति को दोनों देशों के बीच जांगबन्दी केलिए मध्यस्थता की पहल करनी चाहिए: मुफ़्ती अब्दुल्ला अज़हर कासमी

रांची: मुस्लिम मजलिस उलेमा इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती अब्दुल्ला अज़हर कासमी ने अपने प्रेस बयान में कहा कि मौजूदा हालात से दुनिया चिंतित है। शासक वर्ग दर्शक बन गया है, और फिलिस्तीनी लोगों को मरने पर असहाय छोड़ दिया है। दुनिया के सामने तीसरे युद्ध के हालात पैदा करने के लिए सिहूनी शक्तियों ने अपने हथियार का रुख निर्दोष फ़िलिस्तीनी लोगों की ओर बढ़ा दिए हैं। गाजा पट्टी में दिन-रात इजरायली मिसाइलों ने हजारों लोगों की जान ले ली है। इजराइली सेना युद्ध के नैतिक नियमों की परवाह न करते हुए दिन-रात अस्पतालों, स्कूलों और आम आवाम के घरों पर रॉकेट और मिसाइलें बरसा रही है। क्रूरता और दण्डमुक्ति जारी है। संयुक्त राष्ट्र शुतुरमुर्ग की तरह रेत में अपना सिर छुपा रहा है, यह सोचकर कि हम दुनिया के लोगों की रक्षा करने की सबसे अच्छी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं, ये उनका भ्रम है। इजराइल ने गाजा में रहने वाले लाखों लोगों की दवा, पानी, बिजली और दैनिक जरूरतों पर प्रतिबंध लगा दिया है। दूसरे शब्दों में कहें तो गाजा पट्टी निवासी को भूखे-प्यासे और जानवरों से भी बदतर समझकर उन्हें मारने पर उतर आये हैं। यदि दुनिया के शासक इसी तरह तमाशबीन बने रहेंगे और दोनों के बीच युद्धविराम और सुलह की भूमिका नहीं निभाएंगे तो दुनिया तीसरे युद्ध की ओर धकेल दी जाएगी। और लाखों लोगों को मौत की सजा दी जाएगी। दुनिया ने पहला और दूसरा विश्व युद्ध देखा है। इतिहासकार इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि यदि मनुष्यों के बीच न्याय न हो तो यह सारा संसार नर्क बन जायेगा। जहां जानवरों के लिए भी सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। दुनिया की वैश्विक शक्तियां अपने हथियारों की खरीद-फरोख्त के लिए ऐसे युद्ध का कारण बनाती हैं। फिर वे दरवाजे के पीछे बैठकर अपनी दुकान चमकाने लगते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो हर देश महाशक्ति बनने का सपना देखने लगता है और अनगिनत खतरनाक हथियारों की आपूर्ति कर मोटा पैसा कमाने के लिए उत्साहित हो जाता है। ऐसे में भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और भारत ने हमेशा दबे-कुचले, कमजोर, बेसहारा और असहाय लोगों का साथ दिया है। मौजूदा सबसे गंभीर स्थिति में भारत के राष्ट्रपति को दोनों देशों के बीच युद्धविराम कराने और मानवाधिकारों की बहाली के लिए मध्यस्थता करने की पहल करनी चाहिए। भारत के लोग दुनिया के सामने बापू के रास्ते पर चलकर दुनिया को संदेश देना चाहते हैं कि समस्याओं का समाधान युद्ध नहीं बल्कि आपसी शांति और बातचीत है। उत्पीड़ित फ़िलिस्तीनी लोग 75 वर्षों से इज़रायली उत्पीड़न के शिकार हैं। भारत ने हमेशा फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों की बहाली की वकालत की है और हर संभव सहयोग प्रदान कर रहा है।

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