Saturday, April 20, 2024
Ranchi News

मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल बीवर्स अस्पताल ने रचा इतिहास, बिना चीरा लगाए हृदय वाल्व का सफलता पूर्ण उपचार

मेदांता रांची हॉस्पिटल ने पहली बार ट्रांसफेचेटर आओर्टिक वाल्व इंप्लाटेशन विधि से बाल्व प्रत्यारोपित कर बुजुर्ग मरीज की जान बचाई

रांची: 23 नवंबर, मेदांता रांची के कार्डियक साइंस टीम के डॉक्टर द्वारा रांची प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन कर हृदय रोगों से जुड़े मुद्दों पर बात की गई। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए डाक्टरों ने बताया कि मेदांता रांची इलाज के साथ लोगों को हृदय रोगों से जुड़े खतरों के बारे में जाकरूक करता है। विभिन्न माध्यमों से पैदा की गई जागरूकता हृदय रोगियों को उनकी स्थिति को खराब होने से बचाने और हृदय को स्वस्थ जीवन शैली जीने में मदद करती है। उक्त बातें निदेशक विश्वजीत कुमार, डॉक्टर मुकेश कुमार अग्रवाल, डॉक्टर नीरज, डॉक्टर बाल, डॉक्टर मिलन, डॉक्टर विनीत, डॉक्टर अमित ने संयुक्त रूप से कहीं। वह प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे। साथ में कार्डियोलॉजिस्ट की पूरी टीम थी।

विश्वजीत कुमार, डॉक्टर मुकेश ने बताया कि हृदय रोगों के कई रूपों को स्वस्थ जीवन शैली विकल्पों के साथ रोका या इलाज किया जा सकता है, जबकि अन्य के लिए दवा या सर्जरी की आवश्यकता होती है। दिल की बीमारियों का जल्दी पता चलने पर इलाज आसान होता है। मेदांता अस्पताल अक्सर इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए हृदय रोगों के बारे में प्रचार- प्रसार करने में अग्रणी रहा है। सभी हृदय संबंधी आपात स्थितियां जैसे कार्डियक अरेस्ट, तीव्र हृदय विफलता, कार्डियक अतालता, अस्थिर एनजाइना और विकारों को पूरा करना। इस मौके पर मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डा. मुकेश अग्रवाल ने एक अनोखा और अद्वितीय मेडिकल स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि मेदांता रांची के डाक्टरों ने एक मरीज़ का सफल इलाज किया। यह झारखंड में पहला केस, जहां बिना सर्जरी के मरीज के दिल के वाल्व को बदला गया है। उन्होंने बताया कि यह इलाज का एक बहुत ही एडवांस फॉर्म है, जिसमे ट्रांसफेवेटर आओर्टिक बाल्व इंप्लाटेशन पद्धति का इस्तेमाल किया गया है। मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डा. मुकेश अग्रवाल ने बताया कि मरीज उनके पास कुछ समय पहले आई थी। मरीज को रात में सोने में काफी दिक्कत होती है, उनकी मांस भी फूलने लगती थी। मरीज समस्या को सुनने के बाद पहले उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। मरीज की समस्या को देखते हुए डाक्टरों की एक टीम का गठन किया गया। डाक्टरों ने समझा कि क्योंकि मरीज का दिल कमजोर है इसलिए कोई रिस्क नहीं लिया जा सकता, उनका इलाज इस तरह से करना होगा उनका दिल सुरक्षित भी हो जाए और उन्हें कोई तकलीफ भी ना हो। मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डा. मुकेश अग्रवाल ने बताया कि इस वाल्व को बदलने के दो तरीके थे एक सर्जरी के माध्यम से और दूसरा नस के माध्यम से वाल्व का प्रत्यारोपन करना। काफी सोचने के बाद यह निर्णय लिया गया कि दूसरा तरीका अपनना चाहिए क्योंकि दिल कमजोर और सर्जरी की वजह से मरीज की जान को खतरा भी हो सकता है। डाक्टरों की टीम ने 14 नवंबर को बार ट्रांसकेथेटर आओर्टिक वाल्व इंप्लाटेशन पद्धति के माध्यम से इलाज किया, जिसमें मरीज के नस के माध्यम से बाल्व का प्रत्यारोपन किया गया। जिसके बाद मरीज पूरी तरह से स्वास्थ है।

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