Sunday, April 21, 2024
Ranchi News

रमजान में ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में गुजारें :कौसर परवीन

 

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 राँची : रमजान में महिलाओं पर काम का बोझ बढ़ जाता है या यूं कहें कि इस महीने में आम दिनों से वह ज्यादा व्यस्त रहती हैं।  बच्चों और बड़ों की पसंद को ध्यान में रखते हुए सेहरी और इफ्तार का आयोजन करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन महिला घर के इस जिम्मेदारी को शान से निभाती है।इस महीने में खाना दारी का मजा ही कुछ और होता है। सेहरी और इफ्तार के लिए तरह तरह के पकवान तैयार करतीं हैं।घरेलू काम काज के बाद फिर पांच वक्त नमाज के लिए समय निकालती हैं। इस के बाद भी महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी इस शुभ महीने की प्रतीक्षा करते हैं और तहे दिल से इसका स्वागत करते हैं।रमजान के दिनों में महिलाएं दिन व रात कैसे गुजारती हैं और उन्हें किन परिशानियों का सामना करना पडता है, जानते हैं रांची के जाने माने समाजिक कार्यकर्ता कौसर परवीन से।कलाल टोली निवासी  कौशर परवीन रमजान माह में सभी रोजे रखती हैं। वह पांचों वक्त की नमाज भी पढ़ती हैं। रोजे और नमाज के साथ अपने कार्य को भी बखूबी अंजाम दे रही हैं।  कौशर ने बताया कि रोजा फर्ज है। इसे रखना जरूरी है। रोजे को लेकर कभी काम काज में कोई  दिक्कत नहीं आती है। वह बचपन से रोजा रखती आई हैं।ऐक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि कुछ घरों में महिलाएं अपने बच्चों के साथ बातचीत में गलत शब्द का प्रयोग करते हैं डांट-फटकार और चिल्लाती  है अश्लील शब्दों का इस्तेमाल भी करती हैं।  महिलाओं को इस प्रक्रिया पर नियंत्रण रखना चाहिए।इससे न केवल बच्चों की  बेहतर तरबीयत होगी, बल्कि इसका हमारे नफस जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
अन्त में कौसर परवीन ने मुस्कुराते हुए कहा कि रमजान मेहमानों की तरह होता है तो जिस तरह मेहमान के स्वागत की तैयारी की जाती है यानी घर को सजाया और साफ सुथरा किया जाता है उसी तरह खाना भी पहले से बनाया जाता है ताकि बात करने का मौका ज्यादा मिले।  मेहमान के आने के बाद किचन में जाना न पड़े , इसी तरह रमजान का भी सम्मान करें और ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में बिताएं।

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