20 रमजान हुआ पुरा, एतकाफ शुरू
20 रमजान हुआ पुरा, एतकाफ शुरू
जानें- क्या होता है एतकाफ, इस्लाम में क्या है इसका महत्व
******** गुलाम शाहिद* *****
रांची . रमजान में हर दिन हर पल का खास महत्व है। 21वें रमजान से रमजान माह और खास हो जाता है। इसमें कई अकीदतमंद एतकाफ पर चले जाते हैं, यानी बाहरी दुनिया से अलग।एतिकाफ़ अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है ठहर जाना और ख़ुद को रोक लेने के हैं । इस्लामी शरीयत की शब्दावली में एतिकाफ़ रमज़ान के आख़िरी अशरा(महीने के अंतिम 10 दिन) में इबादत के मक़सद से मस्जिद मैं ठहरे रहने को कहते हैं।मुस्लिम समुदाय के लोग 20वें रोजे को असर – मगरिब की आजान के बीच एतकाफ में बैठते हैं और आखिरी रोजे (29 या 30) को ईद का चांद दिखने पर निकलते हैं.एतकाफ के लिए मुसलमान पुरुष रमजान के आखिर के 10 दिनों तक मस्जिद के किसी कोने में बैठकर इबादत करते हैं और खुद को परिवार व दुनिया से अलग कर लेते हैं.
वहीं, महिलाएं घर के किसी कमरे में पर्दा लगाकर एतकाफ में बैठती हैं. एतकाफ के दौरान लोग 10 दिनों तक एक ही जगह पर खाते-पीते, उठते-बैठते और सोते जागते हैं और नमाज- कुरान पढ़कर अल्लाह की इबादत करते हैं. हालांकि, बाथरूम या वाशरूम जाने की उन्हें इजाजत होती है.इस्लाम धर्म के लोगों का मानना है रमजान के आखिर में एतकाफ में बैठने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है.उलेमा बताते हैं कि एतकाफ के दौरान रोजेदार मस्जिद में रहकर नमाज, तिलावत, तस्बीह, तस्बीह तकबीर और गुनाहों से तौबा करते हैं। वे इबादत में इतना डूब जाते हैं कि उन्हें बाहरी दुनिया से कोई लेना देना नहीं रह जाता । एतकाफ दरअसल एक प्रकार से मन पर नियंत्रण रखने की कठोर साधना है।
इसमें व्यक्ति इबादत करते हुए जीवन को संवारता है। ईद का चंाद नजर आने के बाद ही रोजेदार मस्जिद से बाहर आते हैं। रमजान माह में नबी-ए-करीम ने पाबंदी के साथ एतकाफ किया। इसी वजह से इस अमल का बहुत ऊंचा दर्जा है। हदीस में बताया गया है कि रमजान में पैगंबर मोहम्मद भी एतकाफ में बैठा करते थे. इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, एतकाफ में बैठकर इबादत करने वाले लोगों को अल्लाह सभी गुनाहों / पापों से मुक्त कर देता है. एक हदिस में है – – मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक बार पहले रमजान से लेकर रमजान की बीसवीं तक एतिकाफ़ करने के बाद कहा: मैं ने शबे क़द्र की तलाश के लिए रमजान के पहले असरे(दस दिन) का एतिकाफ़ (मस्जिद में रात दिन इबादत करना) किया फिर बीच के अशरे का एतिकाफ़ किया फिर मुझे बताया गया कि शबे कदर आखरी असरे में है सो तुम में से जो शख्स मेरे साथ एतिकाफ़ करना चाहे वह कर ले। (सही मुस्लिम, पृष्ठ 594, हदीस 1168)

You Might Also Like
इस स्वतंत्रता दिवस, देखिये देशभक्ति, शौर्य और बलिदान की कहानी ‘बॉर्डर 2’ का वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर, सिर्फ ज़ी सिनेमा पर
मुंबई, अगस्त 2026: इस स्वतंत्रता दिवस, ज़ी सिनेमा बॉर्डर-2 के वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर के साथ भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य,...
मुफ्ती अब्दुल्लाह अजहर कासमी की दुआओं के साथ मदीना ट्रेवल्स से 139 जायरीन उमरा के लिए रवाना
रांची, 31 जुलाई। हर मुसलमान की ख्वाहिश होती है कि उसे अपनी जिंदगी में हज और उमरा की सआदत नसीब...
मरहूम हाजी हुसैन अंसारी साहब के नाम पर हो मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कोचिंग योजना : तनवीर अहमद
रांची, 30 जुलाई।सामाजिक कार्यकर्ता तनवीर अहमद ने झारखंड सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कोचिंग योजना का स्वागत करते...
مدینہ ٹریولس علماء کرام کی قیادت میں عمرہ کی خدمات فراہم کرنے والا ایک معتمد ادارہ ہے مولانا الیاس مظاہری
سرزمین تاراناکھو بسگی میں عظیم الشان زیارتِ حرمین شریفین کانفرنس کا انعقاد بسگی تاراناکھو( گریڈیہ ): گزشتہ شب بسگی تاراناکھو...








