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विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम स्वागत योग्य : रानी कुमारी

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रांची। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तिकरण व विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक सशक्त माध्यम है।
राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती अभिरुचि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है। राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं को समुचित सम्मान देने से लोकतंत्र मजबूत होगा।
उक्त बातें महिला हितों के संरक्षण हेतु झारखंड में संघर्षशील संस्था ‘नारी शक्ति सेना’ (गुलाबी गैंग) की संस्थापक अध्यक्ष व शहर की जानी-मानी समाजसेविका पूर्व जैक पार्षद रानी कुमारी ने एक वक्तव्य में कही।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से महिलाओं के लिए राजनीतिक क्षेत्र में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जाना स्वागत योग्य है। निसंदेह पंचायतों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं, लेकिन नीति निर्माण की शीर्ष प्रक्रिया में भी महिलाओं की भूमिका बढ़ने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोकसभा व विधानसभा में महिलाओं के भागीदारी 15 प्रतिशत से भी काम है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम से लोकसभा व विधानसभा में सीटें बढ़ेगी। इससे नीति निर्माण के स्तर पर महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाएं समर्पण के साथ अपने परिवार की जिस तरह देखभाल करती है, उसी प्रकार एक महिला विधायक व एक महिला सांसद अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता पर रखते हुए उसके निदान की दिशा में भी ठोस पहल करेगी।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं नीति निर्धारक के रूप में आगे आयेंगी तो महिला उद्यमिता को भी बल मिलेगा। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देने वाली नीतियां सशक्त होंगी। राजनीति में आधी आबादी की भागीदारी बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम सिर्फ एक विधायी सुधार ही नहीं, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने वाला मील का एक पत्थर साबित होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार इस अधिनियम को यथाशीघ्र लागू कर महिलाओं को राजनीति में समुचित भागीदारी प्रदान करने का अवसर देगी। रानी कुमारी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित करने में सभी दलगत हितों से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर एकजुटता दिखाएं, क्योंकि यह अधिनियम भारतीय महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण ही नहीं, बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास से भी संबंधित है।

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