रमजान का महीना सब्र का महीना है: अधिवक्ता मो शमीम


रांची: रमजान सब्र और गम(दूसरो के गम को समझने) का महीना है। रमजान नेकियों का महीना है। धैर्य(सब्र) के बिना कोई भलाई(नेकी) नहीं की जा सकती हैं। न तो रोजा रखा जा सकता है और न ही कोई इबादत की जा सकती है। रमजान गुनाहों से तौबा का महीना है। और बिना धैर्य(सब्र)के कोई भी गुनाह से नहीं बचा जा सकता। सब्र कि एक किस्म इंसान अपने रब और उसके रसूल का फ़रमाबरदार हो जाए। और हर हाल में अल्लाह और उसके रसूल की नाफरमानी करने से बचे। चाहे कितना भी कठिन परिस्थिति क्यों न हो, सहन करे और अल्लाह पर भरोसा रखे।
मो शमीम अधिवक्ता एक्सक्यूटिव सदस्य झारखंड मुस्लिम माइनोरिटी एडवोकेट एसोसिएशन

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