निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगाए सरकार
प्राइवेट हॉस्पिटल संचालकों की नकेल कसने को लेकर मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को भेजा पत्र
रांची। राज्य के सरकारी अस्पतालों की बदहाली का फायदा निजी अस्पतालों के संचालक उठा रहे हैं। निजी अस्पताल प्रबंधकों द्वारा बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के एवज में मरीजों से भारी-भरकम राशि वसूली जा रही है। निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का तो आर्थिक शोषण होता ही है, इन अस्पतालों के ओपीडी में प्राथमिक उपचार कराने वाले मरीजों से भी मनमानी राशि वसूली जाती है।
राज्य के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को वैसे निजी अस्पतालों को चिन्हित कर कार्रवाई करनी चाहिए,जो मरीजों का आर्थिक शोषण करते हैं।
उक्त बातें झारखंडी सूचना अधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष सह आदिवासी मूलवासी जन अधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कही। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को ईमेल से पत्र संप्रेषित कर निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगाने का अनुरोध किया है।
उन्होंने सभी प्रकार के रोगों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में दर का हो निर्धारण करने और इलाज के शुल्क संबंधी जानकारी अस्पतालों में सार्वजनिक रूप से शिलापट्ट पर अंकित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आधारभूत संरचनाओं की कमी के कारण निजी अस्पताल तेजी से फल-फूल रहे हैं। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के एवज में निजी अस्पताल मरीजों से मनमानी राशि ऐंठ ले रहे हैं।
मरीजों की कैसे लूट की जा रही है, इसका ज्वलंत उदाहरण टाटीसिल्वे स्थित स्वर्णरेखा अस्पताल का है, जिसमें एक मरीज से ऑक्सीजन देने के नाम पर दस हजार रुपए अधिक वसूल लिया गया था। मरीज के परिजनों ने इस संबंध में आईएमए से गुहार लगाई। आईएमए के स्टेट सेक्रेटरी के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन ने वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस किया। इसी प्रकार बूटी मोड़ स्थित लाइफ केयर अस्पताल के संचालक द्वारा 25 अप्रैल,2023 को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में पहुंची एक महिला मरीज से 30 हजार रुपए जमा करने को कहा गया। जब परिजन वहां से दूसरे अस्पताल मरीज को लेकर जाने लगे तो इलाज के नाम पर मात्र तीन घंटे में ही 9900 रुपए का बिल थमा दिया। मरीज के परिजनों द्वारा काफी आरजू मिन्नत करने के बाद मात्र 900 रुपए डिस्काउंट किया गया।
उन्होंने कहा कि आए दिन निजी अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों के साथ बदसलूकी और इलाज के नाम पर अधिक राशि वसूली के मामले समाचार पत्रों की सुर्खियां बनती हैं।
श्री नायक ने कहा कि रिम्स सहित राज्य के विभिन्न जिलों के सदर अस्पतालों की स्थिति अच्छी नहीं है। आधारभूत संरचनाओं और चिकित्सकों की कमी के कारण सरकारी अस्पताल बदहाल हैं। विभिन्न समस्याओं से सरकारी अस्पताल जूझ रहे हैं। ऐसे में गरीब जनता निजी अस्पतालों का रुख कर अपने जीवन भर की जमा पूंजी लुटाने पर विवश होती है। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि झारखंड के गरीब मरीजों को किफायती दर पर अच्छी और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा व्यवस्था सुलभ हो सके।
श्री नायक ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री एवं आईएमए से मांग किया है कि निजी अस्पतालों में मरीजों के प्राथमिक उपचार के लिए दर निर्धारित की जाय, ताकि गरीब जनता निजी अस्पताल संचालकों के शोषण का शिकार न बने।
उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को ई-मेल से संदेश सब प्रेषित कर
सभी प्रकार के रोगों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में दर का निर्धारण करने, रोगों के इलाज के शुल्क संबंधी जानकारी अस्पतालों में सार्वजनिक रूप से शिलापट्ट पर अंकित करने, निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन चार्ज का एक समान रेट निर्धारित करने, राज्य के सभी सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने,सभी सरकारी अस्पतालों में अस्पताल प्रबंध समिति गठित कर स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधि को शामिल करने की मांग की है।

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