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प्रसिद्ध उर्दू पत्रकार पूर्व स्थानीय संपादक सैयद अमीर हुसैन रिजवी की याद में शोक सभा का आयोजन

रांची: प्रसिद्ध उर्दू पत्रकार पूर्व स्थानीय संपादक सैयद अमीर हुसैन रिजवी की याद में आज दिनांक 6 नवंबर 2023 दिन सोमवार को मस्जिद जाफरिया कैंपस में शोक सभा का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड झारखंड के अध्यक्ष मौलाना सैयद तहजीब उल हसन रिजवी ने की और संचालन नौजवान शायर सोहेल सईद ने किया।

झारखंड के सबसे सीनियर उर्दू पत्रकार खुर्शीद परवेज सिद्दीकी ने नाम आंखों से उन्हें याद करते हुए कहा के रिजवी साहब मेरे दोस्त थे। बहुत अफसोस होती है के उर्दू समाज जिंदा और मुर्दों को अब याद करने का रिवायत खत्म कर रही है। रिजवी साहब को भुलाया नहीं जा सकता। वहीं कांग्रेस के सीनियर लीडर अजय नाथ शाहदेव ने शौक व्यक्त करते हुए कहा के सोसाइटी समाज राज्य के लिए लॉस है रिजवी साहब का जाना। हम उनके परिवार से कहना चाहते है कि उनके नाम से एक अवॉर्ड की घोषणा की जाए। ताकि उनको इसी बहाने याद किया जा सके।

वहीं प्रोफेसर हरविंदर वीर सिंह ने कहा के रिजवी साहब ने पत्रकारिता के लिए पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी। उर्दू जबान में अखबार निकालना बहुत मुश्किल कार्य है। हम रिजवी साहब को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। वहीं झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष कांग्रेस नेता शमशेर आलम ने कहा के मेरी यह खुशनसीबी है कि हम रिजवी साहब के बड़े अजीज थे।

रिजवी साहब हमेशा अपने नेक मशविरा मुझे देते। रिजवी साहब निर्भीक पत्रकार थे, जो अब हमारे बीच नहीं रहे। हमें याद है रिजवी साहब, खुर्शीद प्रवेज सिद्दीकी, मुजफ्फर हसन, और ऐसे लोगों ने उर्दू की लड़ाई लड़ी और मधु कोड़ा सरकार ने उर्दू को दूसरा लैंग्वेज का दर्जा दिया। वहीं श्री महावीर मंडल के अध्यक्ष जय सिंह यादव ने कहा के रिजवी साहब उस समय काम किया। 1990/ 92 में जब पूरा देश जल रहा था। उसे वक्त रिजवी साहब संप्रदायिक सौहार्द बनाने का काम किया। और लोगों को जोड़कर संप्रदायिक सौहार्द बनाया।

वहीं लोक सेवा समिति के अध्यक्ष नौशाद खान ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा के रिजवी साहब नेक और सच्चे इंसान थे। हम यह घोषणा करते हैं की झारखंड के सर्वोच्च नागरिक सम्मान झारखंड रत्न मरणोपरांत से रिजवी साहब को परिवार को दिया जाएगा।

वही झारखंड के सीनियर पत्रकार मुजफ्फर हसन ने कहा के पत्रकारों का काम है मोहब्बत बांटना। रिजवी साहब बड़ी मेहनत किए हैं उर्दू अखबार के लिए। उर्दू को घर-घर पहुंचने वाले शख्स थे रिजवी साहब। नौजवानों को जोड़ने का काम किया। हम अलग-अलग अखबार में रहते हुए मेरी दोस्ताना दोस्ती रही। लेकिन 40/50 साल से अखबार में सेवा देने के बाद रिजवी साहब को क्या मिला एक अलग विषय हैं।

वहीं सीनियर पत्रकार वकील अहमद रिजवी ने कहा के रिजवी साहब से हमारी मुलाकात 1978/ 80 से है। हमने उनके साथ काम किया मेरी फैमिलीयर रहें। वह पत्रकार के साथ एक अच्छे शायर भी थे। वहीं सीनियर पत्रकार मुस्तकीम आलम ने कहा कि रिजवी साहब बहुत नेक दिल इंसान। वहीं सर्वधर्म सद्भावना समिति के अध्यक्ष मोहम्मद इस्लाम ने कहा कि रिजवी साहब कलम के दुनिया के बेताज बादशाह थे।

वहीं अध्यक्षता कर रहे हजरत मौलाना सैयद तहजिबुल हसन रिजवी ने उन्हें याद करते हुए कहा के हमेशा दूसरों के काम आने वाले शख्स का नाम अमीर हुसैन रिजवी था। वह कॉम व मिल्लत के लिए सोचते थे। हमेशा उनकी कोशिश रहती थी की हर कलमा पढ़ने वाला मुसलमान एक चटाई पर आ जाए। इस शोक सभा में मौलाना तहजीब उल हसन रिजवी, जय सिंह यादव, अजय नाथ शाहदेव, खुर्शीद परवेज सिद्दीकी, प्रोफेसर हरविंदर वीर सिंह, मुजफ्फर हसन,

वकील अहमद रिजवी, मुस्तकीम आलम, खुर्शीद हसन रूमी, शारिब खान, एस एम खुर्शीद, एस एम आसिफ, नौशाद खान, मोहम्मद इस्लाम, नफीसुल आबिदीन, सैयद शहरोज कमर, तनवीर खान, अख्तर अंसारी, अमीन अहमद, अब्दुल मन्नान, अब्दुल खालिक, सैफ उल हक, सैयद निहाल अहमद, इकबाल फातमी, निहाल हुसैन सरियावी, गुलाम शाहिद, परवेज कुरैशी, नौशाद आलम, आसिफ, असफर, नसीम, नकी रिजवी, अबूजर गफारी, आदिल रशीद, गुड्डो, समेत कई लोग मौजूद थे।

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