विश्व रक्तदाता दिवस 14 जून को मनाया जाता है। आप सभी मानवीय-रहमदिल-सभ्य व्यक्तित्व एवं नागरिकों को विश्व रक्तदाता दिवस पर बधाई हो:


विश्व रक्तदाता दिवस मानवीय/रहमदिल/सभ्य व्यक्तित्व का दिवस है क्योंकि नियमित रक्तदान मानवीय और रहमदिल लोगों ही करते है।
“मानवता की एक बूंद। रक्तदान करें। जीवन बचाएं। ” (One Drop of Humanity.Give Blood. Save Lives.) इस मानवीय और अपीलीय थीम के तहत विश्व में रक्तदाता दिवस मनाया जा रहा है।
झारखंड सरकार द्वारा रक्तदान-महादान पर विशेष फोकस शुरु है जिसमें राज्य भर में रक्तदान-महादान शिविर अभियान चला,झारखंड के राजपाल द्वारा युवा दिवस पर रक्तदान-महादान महायज्ञ के नाम से शिविर लोकभवन, रांची में आयोजित हुआ,यूजीसी के सचिव ने आदेश दिया कि विश्व रक्तदाता दिवस पर विश्वविद्यालय,महाविद्यालय में रक्तदान शिविर आयोजित हो,झारखंड स्वास्थ्य के प्रधान सचिव ने राज्य के सभी उपायुक्त महोदय को आदेश दिया है कि विश्व रक्तदाता दिवस पर रक्तदान शिविर आयोजित हो। राजधानी रांची सदर अस्पताल के डॉक्टर साहब द्वारा सामूहिक रूप से ऐतिहासिक रक्तदान शिविर आयोजित कर 102 यूनिट रक्तदान थैलेसीमिया पीड़ितों के दिया,वहीं पूर्वी सिंहभूम झारखंड में रक्तदान पर प्रथम श्रेणी और देश के टॉप 10 में शामिल है जहां टाटा समूह आज भी झारखंड रक्तदान में सर्वश्रेष्ठ और अदभुत पर विचारणीय एवं मानवीय रूप से राज्यहित में अनुग्रहित करने योग्य है।
वहीं ग्रामीण झारखंड रक्तदान में भी राज्य आगे बढ़ रहा है जैसे घाटशिला के धालभूमगढ़ में दो दिन के लगातार रक्तदान शिविर मेला में 1000 यूनिट रक्तदान एकत्रित हो रहा है वह भी हर वर्ष और वहीं के सजग मानवीय नागरिकों द्वारा जो बिन सरकारी सहयोग के यह सभी सरहनीय और अदभुत कार्य हो रहें है,ऐसे भी अधिक्तर रक्तदान पर कार्यरत सक्रिय संगठन/आयोजक/व्यक्ति बिन सरकारी सहयोग के कार्य मानवीय और राज्यहित में करते है जिसपर आज तक झारखंड सरकार ने सुध नही ली,पर अभी भी झारखंड सरकार द्वारा रचनात्मक/सकारात्मक उत्कृष्ट कार्य रक्तदान-महादान के नीति/क्रियान्वयन में होने बाकि है जो व्यवहारिक/तार्किक/मानवीय/राज्यहित में आवश्य करना चाहिए।
ख़ैर फिर भी झारखंड के 24 जिलों के सक्रिय रक्तदान आयोजकों/रक्तदान संगठनों के समन्वय अनुसार
भारत में झारखंड के रक्तदान की स्थिति चिंताजनक और असंतुलित बनी हुई है,जहाँ तक राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख से अधिक यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, लेकिन इसका केवल आधा से भी कम हिस्सा ही संग्रहित हो पाता है। इसमें स्वैच्छिक रक्तदान का प्रतिशत केवल 15% के करीब होता है जहां रिम्स और रांची सदर अस्पताल जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में भी अक्सर गंभीर ब्लड संकट देखने को मिलता है।
राज्य में रक्तदान मांग और आपूर्ति में भारी अंतर: झारखंड में हम रक्तदान संगठनों अनुसार अनुमानित हर साल 10 लाख से अधिक यूनिट रक्त की जरूरत है।
(5 लाख रक्त विकार रोगियों हेतू और 5 लाख रोड़ एक्सीडेंट/एनीमिया/गर्भवती माताओं/रोजमर्रे के भर्ती मरीज़)
जिसमें झारखंड में रक्त विकार रोग/असाध्य रोग से पीड़ित रोगियों में थैलेसीमिया/सिकल सेल एनीमिया/अप्लास्टिक एनीमिया/हीमोफीलिया के अनुमानित संख्या 11 हज़ार से अधिक मरीज़ बच्चें है जिनको हर महीनें में दो से तीन यूनिट औसतन ब्लड की आवश्यकता पड़ती है उसके बाद ब्लड कैंसर/रोड़ एक्सीडेंट/ गर्भवती माता/डायलिसिस/एनीमिया एवं रोजमर्रे के हॉस्पिटल में भर्ती मरीज़ों की संख्या ।
जिसके मुकाबले कुल आवश्यकता अनुसार में 20 प्रतिशत के करीब ही रक्त जमा हो पाता है।
यह सभी हम राज्यस्तरीय रक्तदान संगठनों के समन्वय अनुसार आंकड़ा है क्योंकि झारखंड सरकार द्वारा रक्तदान पर कार्यरत संस्था “जैसेक्स” झारखंड राज्य एड्स कंट्रोल सोसाईटी द्वारा 10 साल पूरा आज तक वहीं आंकड़ा 3.6लाख की आवश्यकता है हम 3.5लाख प्राप्त कर लेते है।
जिसपर आवश्यकता है रक्त की मांग और आपूर्ति के सर्वे/समीक्षा की।
राज्य में कुल रक्त संग्रह का बड़ा हिस्सा ‘ब्लड रिप्लेसमेंट डोनर्स’ (मरीज के परिजनों द्वारा दिए जाने वाले खून) से आता है,जबकि विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक रक्तदान का स्तर बेहद कम (लगभग 15%) है।
राज्य के 24 जिलों में से 21 जिलों में उपयुक्त ब्लड की व्यवस्था नही हो पाती है जिनको ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन कहते है,इसी के द्वारा थैलेसीमिया/सिकल सेल पीड़ितों सहित बच्चों हेतु ब्लड/प्लाज़्मा/एसडीपी/प्लेटलेट्स बनाया जाता है।जिसकी घोषणा रह रह कर होते रहती है पर अभी तक जमीन पर लागू नही है।
राज्य के 24 जिलों में सदर अस्पताल ब्लड बैंक और रेड क्रॉस सोसाईटी समेत व्यवहारिक- तार्किक-मानवीय-तकनीकी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव भी है जिसमें उपयुक्त बैठने की व्यवस्था/वेटिंग हॉल में वेटिंग सामग्री/पेयजल/महिला-पुरुष शौचालय/ब्लड बैंक का फोन/ब्लड नेट पोर्टल अपडेट/सार्वजनिक सूचना पट्टी/ब्लड की उपलब्धता की सार्वजनिक सूचना/संबंधित अधिकारियों नाम-पद-नंबर की सार्वजनिक सूचना इन सभी का अभी तक आभाव होना।
इन सभी में महत्वपूर्ण भाग सरकारी ब्लड बैंक के कर्मियों का मानवीय-आत्मीय-व्यवहारिक व्यवहार होना जिसका घोर आभाव है जो रहरह कर परिजनों/मरीज़ों द्वारा सामने आते रहता है।
झारखंड सरकार के कर्मचारियों को रक्तदान करने एवं प्रोत्साहन पर झारखंड सरकार का आदेश 2018 को लागू किया जाए। जिसमें रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए झारखंड सरकार ने सरकारी सेवकों को कार्य दिवस पर रक्तदान करने पर विशेष आकस्मिक अवकाश (Special Casual Leave) देने का प्रावधान किया है। सरकारी कर्मी प्रत्येक वर्ष चार बार स्वैच्छिक रक्तदान करें। हमलोग तो केवल 2 बार ही उम्मीद करते है उतने में ही झारखंड में रक्तदान की स्थिति बहुत सुधर जाएगी।
झारखंड में सरकारी एवं निजी अस्पताल में अपने ही भर्ती मरीजों हेतू नियमित रक्तदान-महादान शिविर आयोजित हो जिसको हमलोग भर्ती मरीजों के आदेश झारखंड सरकार ने 2018 कहते है उसे सख्ती से लागू किया जाए।
स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करने हेतू झारखंड सरकार को चाहिए कि रक्तदान हेतु अल्पहार/रिफ्रेशमेंट को 100 रुपया करें जो झारखंड गठन से अब तक रक्तदाताओं को 25 रूपये का रिफ्रेशमेंट दिया जाता है।
(बोतल बंद पानी -10/पैकेट जूस-10 रुपया/बिस्कुट या चॉकलेट-05 रुपया)
जिसपर भाकपा माले के माननीय विधायक कॉमरेड अरुप चटर्जी और झारखंड कांग्रेस विधायक दल के नेता माननीय प्रदीप यादव जी ने विधानसभा में कई बार उठाया है और चिट्टी भी माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री झारखंड को भी लिखी है।
ब्लड रिप्लेसमेंट डोनर कार्ड को चालू किया जाए जिससे पुनः लोकसेवक द्वारा चाईबासा घटना (थैलेसीमिया पीड़ित को एचआईवी पॉजिटिव ब्लड चढ़ाने) के बाद बंद कर दिया गया है। जो 09 अप्रैल 2025 को झारखंड सरकार द्वारा चालू हुआ जिसपर माननीय विधायक अरुप चटर्जी और माननीय विधायक प्रदीप यादव की वजह से झारखंड विधानसभा में तीन बार उठाने पर यह आदेश हुआ। जो पहले 7 सालों से दिग्भ्रमित/अव्यवहारिक सूचना देकर बंद कर दिया गया था।
फिर वहीं दिख रहा है जबकि यह माननीय विधानसभा/माननीय विधायक/माननीय मंत्री की अवमानना का मामला है जिसको खुद यह माननीय चालू किए और एक लोकसेवक बंद कर दिए।
झारखंड में स्वास्थ्य मुख्यालय “एनएचआरएम” नामकुम,रांची में आज तक रक्तदान-महादान शिविर आयोजित नही हुआ जबकि यहां लाखों-लाख के वेतन पाने वाले लोकसेवक/अधिकारी मौजूद है जहां से स्वास्थ्य की नीति निर्धारण की योजना बनती है जो अब यह व्यवहारिक/तार्किक होगा कि यहां राज्यहित में रक्तदान-महादान शिविर अवश्य आयोजित हो।
झारखंड सरकार नियमित रक्तदाता/रक्तवीर को स्वास्थ्य की सुरक्षा दें आयुष्मान कार्ड या इनके लिए कोई योजना बनाएं।जो दूसरे की जान अपना खून देकर बचाता है उसे सरकार को स्वास्थ्य की सुरक्षा देनी चाहिए।
झारखंड में रक्तवीर/नियमित रक्तदाताओं को अंतरराष्ट्रीय/राष्ट्रीय/राजकीय क्रिकेट/फुटबॉल एवं अन्य खेलकूद मैच का वीआईपी पास देना चाहिए। जिससे युवाओं में रक्तदान काफ़ी बढ़ जाएगा।
झारखंड में रक्तदान का ब्रांड एम्बेसडर बनाया जाए।
झारखंड में रक्तदान-महादान के जनजागरूकता/प्रोत्साहन/शिविर में पब्लिक आइकॉन/सेलेब्रिटी/जनप्रतिनिधियों/लोकसेवक/अधिकारियों/डॉक्टर/इंजीनियर/आध्यात्मिक-धर्मगुरुओं गुरुओं/सामाजिक-व्यापारिक-प्रोफेशनल-धार्मिक संगठनों एवं सामाजिक सेवकों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
अगले वर्ष विश्व रक्तदाता दिवस में झारखंड
की स्थिति रक्तदान पर ऐतिहासिक बेहद सराहनीय जरूर होगी।
रक्तवीर नदीम खान
(38 वीं बार के सरकारी ब्लड बैंक के रक्तदाता/सरकारी ब्लड बैंक के सैकड़ों रक्तदान शिविर के आयोजक)
राज्य संयोजक
झारखंड राज्य स्वैच्छिक रक्तदान संगठन कॉर्डिनेशन कमेटी
एवं
संस्थापक
लहू बोलेगा रक्तदान संगठन रांची एवं झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन।








