रिस्प्लाइस ऑटिज़्म रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर थोडुपुनुरी कहते हैं


‘‘ऑटिज़्म की शुरुआत गर्भ से ही होती है, इससे पहले कि ऑटिज़्म आपके परिवार और बच्चे के जीवन को पंगु बना दे; एहतियाती कदम उठाएं; ऑटिज़्म से बचाव करें।’’
हैदराबाद स्थित रिस्प्लाइस ऑटिज़्म रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड फाउंडेशन भारत का पहला संस्थान है, जो ऑटिज़्म की रोकथाम के लिए गर्भधारण पूर्व देखभाल (प्रीकॉन्सेप्शन केयर) तथा ऑटिस्टिक बच्चों में गट-ब्रेन एक्सिस पर आधारित करुणामूलक उपचार के रूप में फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांटेशन (एफएमटी) थेरेपी प्रदान करता है।
रिस्प्लाइस ऑटिज़्म रिसर्च फाउंडेशन 31 मई, 2026 को श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, तेतरटोली, बरियातू, रांची में ऑटिज़्म रोगियों के लिए मुफ्त आंत स्वास्थ्य मूल्यांकन और माइक्रोबायोम परीक्षण शिविर का आयोजन कर रहा है।

रांची, 20 मई 2026:हैदराबाद स्थित शोध-प्रेरित संस्थान रिस्प्लाइस ऑटिज़्म रिसर्च फाउंडेशन, जिसकी स्थापना डॉ. चंद्रशेखर थोडुपुनुरी ने की है, भारत का अपनी तरह का पहला स्वास्थ्य केंद्र है, जो ऑटिज़्म और अन्य न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के प्रबंधन के लिए समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है। रिस्प्लाइस सही मायने मेंएक शोध-आधारित संस्थान है, जो फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांटेशन (एफएमटी) और ऑटिज़्म व न्यूरोडेवलपमेंटल स्थितियों की रोकथाम हेतु प्रीकॉन्सेप्शन केयर जैसी नवाचारी उपचार पद्धतियों में विशेषज्ञता रखता है। एफएमटी का उपयोग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों, कीमोथेरेपी के बाद आंतों की रिकवरी संबंधी समस्याओं और अधिकांश गैर-संचारी रोगों में भी संभावनाओं के रूप में किया जा रहा है। रिस्प्लाइस ऑटिज़्म रिसर्च फाउंडेशन, प्रोविडेंस माइक्रोबायोम रिसर्च सेंटर के साथ मिलकर ऑटिज़्म के लिए फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट (एफएमटी) पर कार्य कर रहा है, जो आईसीएमआर के साथ पंजीकृत है। वर्तमान में यह अध्ययन जारी है और यह भारत का पहला संस्थान है, जो कई आधुनिक विकारों का मूल कारण माने जानेवाले गट-ब्रेन एक्सिस पर केंद्रित करुणामूलक उपचार के रूप में एफएमटी को प्रदान करता है। रिस्प्लाइस ऑटिज़्म रिसर्च फाउंडेशन के सतत शोध से यह सामने आया है कि ऑटिज़्म की शुरुआत गर्भ में ही हो जाती है। यदि सही कदम उठाए जाएं तो ऑटिज़्म से ग्रस्त सभी बच्चों का जन्म सामान्य (न्यूरोटिपिकल) रूप में हो सकता है। इसी बढ़ती समस्या को ध्यान में रखते हुए और गर्भावस्था के दौरान ही ऑटिज़्म की रोकथाम के उद्देश्य से रिस्प्लाइस ने ऑटिज़्म प्रिवेंशन प्रोग्राम भी शुरू किया है।
रिस्प्लाइस ऑटिज़्म रिसर्च फाउंडेशन द्वारा 31 मई 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, तेतरटोली, बरियातू, रिम्स के पास, हेल्थ पॉइंट हॉस्पिटल के सामने वाली गली, रांची में ऑटिज़्म मरीजों के लिए नि:शुल्क गट हेल्थ असेसमेंट एवं माइक्रोबायोम टेस्टिंग कैंप आयोजित किया जाएगा। पंजीकरण के लिए 8433529769 / 8433529435 / 9100065552 पर संपर्क करें।
ऑटिज़्म के बारे में जानकारी देते हुए रिस्प्लाइस ऑटिज़्म रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर थोडुपुनुरी ने कहा, ‘‘पिछले चार-पांच दशकों में ऑटिज़्म के मामलों में बढ़ोतरी गंभीर चिंता का विषय है। उभरते वैज्ञानिक तथ्यों से संकेत मिलता है कि कृषि रसायनों और फॉरएवर केमिकल्स (स्थायी कृत्रिम रसायनों) का जैव संचय ऑटिज़्म का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। गर्भधारण की योजना बना रहे दंपत्तियों में इन रसायनों के संपर्क को कम करना और शरीर से इन्हें डिटॉक्स करना ऑटिज़्म के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इस गंभीर जनस्वास्थ्य विषय पर जागरूक सार्वजनिक संवाद और नीतिगत स्तर पर सहभागिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। सम्मेलन का उद्देश्य प्रीकॉन्सेप्शन हेल्थ पॉलिसी पर विशेष ध्यान देते हुए रोकथाम संबंधी रणनीतियों की आवश्यकता को उजागर करना है। इस पहल के तहत फाउंडेशन ने देशभर में ऑटिज़्म से ग्रस्त बच्चों के गट हेल्थ पैटर्न का अध्ययन शुरू किया है। इसके अंतर्गत मीडिया संवाद, जागरूकता शिविर, नि:शुल्क गट हेल्थ असेसमेंट और माइक्रोबायोम टेस्टिंग की जा रही है। इन पहलों से प्राप्त आंकड़े नीति-निर्माताओं को दिशा देने और प्रमाण आधारित हस्तक्षेपों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, हम देशभर में करुणामूलक देखभाल के लिए एफएमटी केंद्र स्थापित करने हेतु अस्पतालों के साथ सहयोग और साझेदारी की दिशा में भी काम कर रहे हैं, ताकि बच्चों को उपचार के लिए लंबी दूरी की यात्रा न करनी पड़े।’’
डॉ. चंद्रशेखर थोडुपुनुरी ने आगे कहा, ‘‘उपरोक्त के अलावा इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हम ऑटिज़्म से प्रभावित व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने में फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांटेशन (एफएमटी) की आशाजनक भूमिका से जुड़े प्रमाण भी प्रस्तुत करना चाहते हैं। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं, लेकिन निवेशकों के लिए प्रोत्साहन की कमी और संरचित शोध समर्थन के अभाव में इस क्षेत्र में प्रगति अभी भी सीमित है। इन चुनौतियों का समाधान विज्ञान आधारित प्रभावी हस्तक्षेपों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है।’’
अपने निरंतर प्रयासों के तहत रिस्प्लाइस ऑटिज़्म रिसर्च फाउंडेशन ने दो राष्ट्रीय अभियान शुरू किए हैं:
• ऑटिज़्म मुक्त भारत अभियान (एएमबीए)
• सेव माइक्रोबायोम एंड सेव हेल्थ (एसएमएएसएच)
डॉ. चंद्रशेखर थोडुपुनुरी ने मीडिया के माध्यम से जोर देते हुए कहा, ‘‘ये अभियान ऑटिज़्म की रोकथाम, जागरूकता और शोध को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं। फाउंडेशन सरकार और संबंधित हितधारकों से अपील करता है कि वे इन पहलों को व्यापक जनहित में आगे बढ़ाने के लिए सहयोग करें।’’
एफएमटी थेरेपी के बारे में बताते हुए डॉ. चंद्रशेखर थोडुपुनुरी ने कहा, ‘‘एफएमटी थेरेपी ऑटिज़्म से ग्रस्त बच्चों में कब्ज, पेट फूलना, फूड एलर्जी, नींद की कमी, प्रतिरक्षा तंत्र में असंतुलन, आक्रामक व्यवहार, स्वयं को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति जैसी समस्याओं को कम करने और मस्तिष्क की कार्यक्षमता सुधारने में सहायक हो सकती है; ये वे मुख्य समस्याएं हैं जिनका सामना कई आॅटिस्टिक बच्चों को करना पड़ता है। एफएमटी एक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें किसी डोनर के मल से लिए गए स्वस्थ गट बैक्टीरिया को मरीज के पाचन तंत्र में स्थानांतरित किया जाता है, ताकि गट माइक्रोबायोम का संतुलन फिर से बहाल किया जा सके। यह प्रक्रिया क्लोस्ट्रिडियम डिफिसाइल संक्रमण और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी स्थितियों में एफडीए द्वारा अनुमोदित है तथा अब न्यूरोलॉजिकल और मेटाबॉलिक विकारों में इसके संभावित लाभों का अध्ययन किया जा रहा है।’’
ऑटिज़्म के मूल कारण के बारे में बताते हुए डॉ. चंद्रशेखर थोडुपुनुरी ने कहा, ‘‘ऑटिज़्म की शुरुआत गर्भ से ही होती है। गर्भधारण के शुरुआती दिनों सहित पूरी गर्भावस्था के दौरान होने वाली घटनाओं का ऑटिज़्म से संबंध पाया गया है। यदि गर्भ में विकसित हो रहे भ्रूण को विषमुक्त वातावरण मिले, तो स्वस्थ और ऑटिज़्म मुक्त शिशु का जन्म संभव है। ऑटिज़्म से बचाव के लिए रिस्प्लाइस ऑटिज़्म रिसर्च फाउंडेशन ने कुछ ऐसे विशेष प्रिवेंशन प्रोटोकॉल भी शुरू किए हैं, जिनका पालन सभी गर्भवती महिलाओं को करना चाहिए। इस मिशन में, जन्म से ही ऑटिज़्म को रोकने के लिए, डॉक्टरों के एक समूह ने- जो खुद ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों के माता-पिता हैं- अपने पेशे को छोड़कर रिस्प्लाइस के साथ हाथ मिलाया है। यह फाउंडेशन केवल डॉक्टरों द्वारा नहीं, बल्कि उन पीड़ित और प्रभावित अभिभावकों द्वारा भी संचालित है, जो स्वयं डॉक्टर हैं।’’
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