जौनपुर की सियासत में एक बार फिर बड़ा नाम सुर्खियों में है


सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी से जौनपुर सदर (366) सीट पर वरिष्ठ नेता मोहम्मद अरशद खान को प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
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मोहम्मद अरशद खान का राजनीतिक सफर लंबा, मजबूत और प्रभावशाली रहा है।
साल 1993 में वे जौनपुर सदर से पहले मुस्लिम विधायक बने, जिसने उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई।
वे कांशीराम के करीबी रहे और बहुजन समाज पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाई।
1994 में कांशीराम ने उन्हें बसपा का राष्ट्रीय सचिव और महाराष्ट्र का प्रभारी नियुक्त किया था।
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इसके बाद उन्होंने डॉ. मसूद अहमद के साथ नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी बनाई, जो करीब 20 वर्षों तक सक्रिय रही।
इस दौरान डॉ. मसूद अहमद 12 साल और अरशद खान 8 साल तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।
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साल 2014 में मुलायम सिंह यादव के आग्रह पर उन्होंने अपनी पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय किया और उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया।
अमर सिंह के बाद पूर्वांचल के 48 जिलों की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई।
वर्तमान में वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के रूप में सक्रिय हैं।
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2024 के लोकसभा चुनाव में जौनपुर सदर विधानसभा में रिकॉर्ड प्रदर्शन देखने को मिला…
यहां सबसे ज्यादा 1,24,000 वोट हासिल हुए — जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।
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2022 विधानसभा चुनाव में आखिरी दिन टिकट मिलने के बावजूद उन्होंने करीब 90,000 वोट हासिल कर अपनी मजबूत पकड़ साबित की।
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राजनीति के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी गहरी पकड़ है।
अम्बेडकर विचार मंच, भारत किसान यूनियन और मदर टेरेसा फाउंडेशन के जरिए वे हर वर्ग के लोगों से जुड़े हैं।
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सूत्रों के मुताबिक इस बार उनका लक्ष्य 1.5 लाख वोट है।
अखिलेश यादव के विजन के साथ वे ज़मीनी स्तर पर लगातार सक्रिय हैं और पी.डी.ए. के मुद्दों पर काम कर रहे हैं।
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अब सबसे बड़ा सवाल — क्या समाजवादी पार्टी आधिकारिक तौर पर उनके नाम का ऐलान करेगी?
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फिलहाल, जौनपुर की राजनीति में मोहम्मद अरशद खान का नाम सबसे आगे चल रहा है!








