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गव्य विकास निदेशक की सामंती कार्यशैली से झारखंड सरकार की छवि हो रही धुमिल : विजय शंकर नायक

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*”सरकार पहुंच रही जन-जन के द्वार, अधिकारी खड़ी कर रहे रजिस्टर और अनुमति की दीवार” !

रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने राज्य सरकार के कृषि, पशुपालन व सहकारिता विभाग के अंतर्गत गव्य विकास निदेशालय के निदेशक द्वारा आगंतुकों के लिए लागू की गई उस व्यवस्था पर आक्रोश व्यक्त किया है, जिसमें आगंतुकों को रजिस्टर में नाम,पता और विभाग में आने का उद्देश्य दर्ज करना है। तत्पश्चात निदेशक द्वारा अनुमति दिए जाने पर ही मिल सकते हैं।

श्री नायक ने कहा कि गव्य विकास निदेशालय कोई सामंती दरबार नहीं, बल्कि किसानों, पशुपालकों, मजदूरों और आम जनता की सेवा के लिए बना सरकारी संस्थान है। यदि किसी किसान को अपनी समस्या लेकर सरकारी अधिकारी से मिलने के लिए पहले यह साबित करना पड़े कि वह अधिकारी से मिलने के ‘योग्य’ है, तो यह व्यवस्था जनसेवा नहीं बल्कि अफसरशाही और सामंती मानसिकता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि झारखंड की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन में किसान एवं पशुपालक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनसे संवाद करने के बजाय उन्हें अधिकारी के दरवाजे पर इंतजार करवाना सरकार की किसान हितैषी नीतियों के बिल्कुल विपरीत है।
श्री नायक ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड सरकार आम जनता तक शासन की पहुंच सुनिश्चित करने और किसानों के हित में काम करने का दावा करती है। लेकिन यदि सरकार के ही किसी निदेशालय में अधिकारी आम नागरिकों से मिलने को अपनी इच्छा पर निर्भर बना दें, तो इससे झारखंड सरकार की छवि खराब होती है।
उन्होंने कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की से मांग की कि वे इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लें और गव्य विकास निदेशक डॉ. संजीव कुमार की सामंती कार्यशैली पर अंकुश लगाएं। आगंतुकों के साथ ऐसी व्यवस्था लागू करने का आदेश तत्काल निरस्त किया जाय और सरकार विरोधी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार ऐसे अधिकारियों को अविलंब हटाया जाय। श्री नायक ने कहा कि सरकारी अधिकारी जनता के सेवक हैं, शासक नहीं। किसानों को अपनी समस्या बताने के लिए अधिकारी की ‘कृपा’ पर निर्भर रहना पड़े, यह निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या राज्य के अन्य निदेशालयों में भी ऐसी व्यवस्था लागू है? यदि नहीं, तो गव्य विकास निदेशालय में ऐसी व्यवस्था क्यों?
उन्होंने कृषि मंत्री से अनुरोध किया कि गव्य निदेशालय में आगंतुकों के लिए जनहित के अनुरूप व्यवस्था बनाई जाय।
किसानों, पशुपालकों और आम नागरिकों से मिलने के लिए पारदर्शी व सुलभ व्यवस्था की जाय।
जनसंपर्क से परहेज करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध यथोचित कार्रवाई की जाय।
श्री नायक ने कहा कि एक ओर झारखंड में सरकार जनता के दरवाजे तक पहुंचने की बात करे और अधिकारी जनता को अपने दरवाजे तक पहुंचने से पहले ‘रजिस्टर और अनुमति’ की दीवार खड़ी करें, यह रवैया अपमानजनक है।

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