अश्रुपूरित श्रद्धांजलि! सरकार को जगाते-जगाते सदा के लिए सो गए देव चरण गोप! रानी कुमारी


एकीकृत बिहार के समय दक्षिणी छोटा नागपुर क्षेत्र के समुचित विकास के लिए तत्कालीन बिहार सरकार ने झारखंड स्वायत्तशासी परिषद (झारखंड ऑटोनॉमस काउंसिल) का गठन किया था। जिसे संक्षिप्त में “जैक” कहा जाने लगा। इसके लिए अध्यक्ष , उपाध्यक्ष व पार्षदों का चयन किया गया। जैक के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को मंत्री व पार्षदों को विधायक का दर्जा दिया गया। तकरीबन पांच साल तक झारखंड स्वायत्तशासी परिषद कार्यरत रहा। इस दौरान उतरी-दक्षिणी छोटानागपुर क्षेत्र के विकास के प्रति सभी जनप्रतिनिधि समर्पित भाव से जुटे रहे।
पूर्व जैक अध्यक्ष के पद पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन व उपाध्यक्ष के पद पर सूरज मंडल ने कमान संभाली। जैक के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष सहित सभी पार्षदों ने अलग राज्य गठन के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य का गठन हुआ। इसके बाद झारखंड स्वायत्तशासी परिषद(जैक) का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया।
उस समय से पूर्व जैक पार्षद मंत्रियों और विधायकों के समकक्ष सुविधाएं प्राप्त करने के लिए संघर्षरत हैं। विधायकों के समान पेंशन व अन्य सुविधाएं प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को कई बार ज्ञापन सौंपा। लेकिन इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई।
गुमला निवासी देव चरण गोप सहित अन्य पूर्व जैक पार्षद पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक के समान सुविधाएं और पेंशन आदि की मांग करते रहे। स्व.गोप सहित अन्य सहयोगियों की भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका रही। सरकार को जगाते-जगाते कई पूर्व जैक पार्षद सदैव के लिए चिर निद्रा में लीन हो गए, लेकिन इसके बावजूद सरकार की नींद नहीं टूट रही है। पूर्व जैक पार्षदों का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार उनकी मांगों पर समुचित विचार करते हुए उन्हें सम्मानजनक पेंशन व अन्य सुविधाएं लागू नहीं करती है।
स्व.गोप सहित अन्य दिवंगत पूर्व जैक पार्षदों को शत-शत नमन।








