आदिवासी संदर्भों में शिक्षा के उद्देश्य पर शिक्षा जगत के नेताओं का चिंतन


रांची: झारखंड तथा अन्य आदिवासी क्षेत्रों से आए शिक्षा जगत के नेताओं, जिनमें शिक्षाविद्, शोधकर्ता, जमीनी स्तर के नेतृत्वकर्ता, फिल्म निर्माता, सामुदायिक संगठन और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल थेने 14 जुलाई को आयोजित रांची एक्सप्लोरेशन सर्कल में भाग लिया। इस संवाद का आयोजन बेंगलुरु स्थित गैर-लाभकारी संस्था ड्रीम अ ड्रीम (Dream a Dream) ने नेटवर्क फॉर एजुकेशन सिस्टम्स ट्रांसफॉर्मेशन (NEST) के सहयोग से किया। NEST एक वैश्विक नेटवर्क है, जिसका समन्वय अमेरिका स्थित ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के सेंटर फॉर यूनिवर्सल एजुकेशन द्वारा किया जाता है।
इस संवाद ने विशेष रूप से आदिवासी और स्वदेशी समुदायों के संदर्भ में शिक्षा के उद्देश्य के महत्व को रेखांकित किया। इन समुदायों में शिक्षा का प्रश्न भूमि, भाषा, संस्कृति और पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। साथ ही, औपचारिक स्कूली शिक्षा और समुदायों के पारंपरिक ज्ञान तथा सीखने के तरीकों के बीच लंबे समय से मौजूद तनाव भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रहा।
वैश्विक शिक्षा विशेषज्ञ, संवाद-संचालक तथा वीविंग होलनेस की लेखिका सुश्री रोमाना शेख द्वारा संचालित इस एक्सप्लोरेशन सर्कल ने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में आत्मचिंतन और संवाद के लिए एक खुला एवं सहभागी मंच प्रदान किया।
एक प्रतिभागी ने कहा, “हममें से कई लोगों के लिए शिक्षा का अर्थ अक्सर अपने ही अस्तित्व के कुछ हिस्सों को पीछे छोड़ देना रहा है। इस संवाद ने हमें याद दिलाया कि शिक्षा हमारी पहचान, हमारी भाषाओं और अपने समुदायों से हमारे संबंधों को मजबूत करने का माध्यम भी बन सकती है, साथ ही युवाओं को भविष्य के लिए तैयार भी कर सकती है।”
प्रतिभागियों ने इस पर विचार किया कि शिक्षा के बारे में हमारी धारणाएँ किस प्रकार मानसिकताओं, संबंधों और शक्ति-संरचनाओं से निर्मित होती हैं, और ये आगे चलकर नीतियों, शिक्षा प्रणालियों तथा बच्चों और युवाओं के अनुभवों को कैसे प्रभावित करती हैं। उन्होंने अपनी स्वयं की शैक्षिक यात्राओं, उनमें मिले अवसरों और अंतर्विरोधों पर भी चिंतन किया तथा इस बात पर विचार किया कि समुदाय की सामूहिक बुद्धिमत्ता में निहित रहते हुए वास्तव में परिवर्तनकारी शिक्षा कैसी हो सकती है।
डॉ. श्रीहरि रविंद्रनाथ, निदेशक – रिसर्च एंड इम्पैक्ट असेसमेंट, ड्रीम अ ड्रीम, ने इस संवाद के महत्व पर कहा:
“एक्सप्लोरेशन सर्कल ने हमें यह सुनने और समझने का अवसर दिया कि विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए प्रतिभागी झारखंड के संदर्भ में शिक्षा के उद्देश्य को किस प्रकार देखते हैं। इस संवाद ने स्थानीय ज्ञान, संस्कृति, भाषा और समुदायों की आकांक्षाओं के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही, इसने ऐसे संवादात्मक मंचों की आवश्यकता को भी सामने रखा, जहाँ ये विविध दृष्टिकोण शिक्षा और शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन से जुड़ी निरंतर चल रही चर्चाओं को सार्थक रूप से दिशा दे सकें।”
रांची संवाद मार्च 2026 से देशभर में आयोजित एक्सप्लोरेशन सर्कल श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई और गुवाहाटी में भी ऐसे संवाद आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें सरकार, शिक्षाविदों, परोपकारी संस्थाओं, नागरिक समाज संगठनों और शिक्षा क्षेत्र के व्यवहारिक विशेषज्ञों सहित 100 से अधिक शिक्षा नेताओं ने भाग लिया।
इन पाँचों शहरों में हुए संवादों से एक साझा संदेश उभरकर सामने आया—शिक्षा केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि बच्चे क्या जानते हैं, बल्कि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वे क्या बनते हैं, वे कहाँ अपना संबंध महसूस करते हैं, और दूसरों तथा दुनिया के साथ किस प्रकार का रिश्ता विकसित करते हैं। प्रतिभागियों ने लगातार इस बात पर बल दिया कि संबंध, भावनात्मक कल्याण, सांस्कृतिक पहचान, गरिमा, अपनापन और मानवीय जुड़ाव सार्थक शैक्षिक अनुभवों के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
जब भारत शिक्षा सुधारों की महत्वाकांक्षी दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में एक्सप्लोरेशन सर्कल इस बात पर बल देते हैं कि नीति और व्यवहार को आकार देने वाली प्रक्रियाओं में विविध दृष्टिकोणों—विशेषकर उन आवाज़ों—के लिए स्थान बनाया जाए, जो ऐतिहासिक रूप से शिक्षा संबंधी विमर्शों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं पा सकी हैं।
श्री शारीक मशहदी, निदेशक – स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स, ड्रीम अ ड्रीम, ने कहा: “आदिवासी दृष्टिकोण हमें शिक्षा के बारे में एक और गहरा प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करता है—क्या होगा यदि सीखने की वास्तविक कसौटी यह न हो कि हम दूसरों से कितना ऊपर उठते हैं, बल्कि यह हो कि हम अपने आसपास के जीवन को कितना फलने-फूलने में सक्षम बनाते हैं?”
इन संवादों को आगे बढ़ाते हुए, ड्रीम अ ड्रीम झारखंड एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल (JEPC), शोध संस्थानों तथा नागरिक समाज संगठनों के साथ मिलकर झारखंड पॉलिसी लैब की स्थापना की दिशा में कार्य कर रहा है। इस पॉलिसी लैब का उद्देश्य झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविकताओं पर आधारित शोध को बढ़ावा देकर साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को सशक्त करना तथा सरकार, शोधकर्ताओं, शिक्षा विशेषज्ञों और समुदायों के बीच सहयोगात्मक सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
रांची एक्सप्लोरेशन सर्कल राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के भविष्य पर चल रही चर्चाओं में आदिवासी दृष्टिकोणों को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत जब अपनी शिक्षा व्यवस्था की नई कल्पना कर रहा है, तब ऐसे संवाद यह रेखांकित करते हैं कि स्थायी और सार्थक परिवर्तन तभी संभव है, जब समुदायों की आवाज़ सुनी जाए, विविध ज्ञान परंपराओं को सम्मान दिया जाए और ऐसी जगहें बनाई जाएँ जहाँ जानने और सीखने के अनेक तरीकों को शिक्षा नीति और व्यवहार का हिस्सा बनने का अवसर मिले।
ड्रीम अ ड्रीम एक भारतीय गैर-लाभकारी संस्था है, जो भारत में गरीबी की परिस्थितियों में रह रहे 13 करोड़ से अधिक बच्चों और युवाओं के लिए शिक्षा के अनुभव को रूपांतरित करने के लिए कार्यरत है। संस्था का उद्देश्य शिक्षा के उद्देश्य को प्रत्येक बच्चे के थ्राइविंग (Thriving) की दिशा में पुनर्परिभाषित करना है। वर्तमान में इसका कार्य भारत के 7 राज्यों में फैला हुआ है और यह प्रत्यक्ष कार्यक्रमों, राज्य सरकारों के साथ रणनीतिक साझेदारियों तथा अन्य गैर-लाभकारी संस्थाओं और फंडिंग साझेदारों के सहयोग से 23 लाख से अधिक बच्चों तक पहुँच बना चुका है।








