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मोहर्रम की पहली तारीख पर कुल्हाड़ी शाह बाबा दरगाह-कर्बला में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

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अकीलुर रहमान की अगुवाई में भव्य आयोजन, प्रमुख खलीफा मो. महजूद ने पेश की पहली चादर

रांची, 17 जून। (आदिल रशीद) मोहर्रम 2026 की पहली तारीख के अवसर पर हज़रत कुल्हाड़ी शाह बाबा दरगाह एवं कर्बला परिसर में बुधवार को पूरे अकीदत, एहतराम और धार्मिक श्रद्धा के साथ विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बाद नमाज़-ए-असर शाम 5:30 बजे दरगाह और कर्बला को चंदन, गुलाब जल और इत्र, पानी से गुस्ल दिया गया। इस दौरान “या हुसैन” और “लब्बैक या हुसैन” के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा तथा माहौल रूहानियत से सराबोर हो गया।


कार्यक्रम का सफल संचालन और व्यवस्था दरगाह कमेटी के महासचिव अकीलुर रहमान के नेतृत्व में किया गया। उनकी देखरेख में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। अकीलुर रहमान ने कहा कि मोहर्रम का महीना इंसानियत, सब्र, कुर्बानी और हक़ की राह पर डटे रहने का पैगाम देता है। हज़रत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला की कुर्बानियां आज भी पूरी इंसानियत के लिए मशाल-ए-राह हैं।


इस्लामी मरकज़ के छात्रों ने तिलावत-ए-क़ुरआन पाक से कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके बाद शोहदाए कर्बला और साहिब-ए-अस्ताना के नाम फातिहा और विशेष दुआएं की गईं। गुस्ल के बाद इमाम बख्श अखाड़ा के सरपरस्त मो सईद एवं प्रमुख खलीफा मो. महजूद की जानिब से दरगाह पर पहली चादर पेश की गई। इसके पश्चात सैकड़ों अकीदतमंदों ने चादरपोशी कर अपनी मुरादों और मन्नतों के लिए दुआ मांगी। प्रमुख खलीफा मो. महजूद ने कहा कि मोहर्रम केवल मातम का महीना नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए दी गई महान कुर्बानी को याद करने का अवसर है। उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारा और एकता बनाए रखने की अपील की।


दरगाह परिसर में देर रात तक चादरपोशी, फातिहाखानी और दुआओं का सिलसिला जारी रहा। खास बात यह रही कि मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर कुल्हाड़ी शाह बाबा की दरगाह पर हाजिरी दी और अपनी अकीदत का इजहार किया। इससे गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी सौहार्द की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली।


इस अवसर पर मो. तौहीद, अफताब आलम, झारखंड के प्रख्यात जनरल फिजिशियन डॉ. एम. हसनैन, मो. इस्लाम, कारी अयूब रिजवी, मौलाना निजाम, मौलाना नसीम, मौलाना नूर मोहम्मद, मो. परवेज बबलू, मो. जहीर, सज्जाद इदरीसी, अब्दुल मन्नान, मो. सोनू, नवाब चिश्ती, हैदर गद्दी, लड्डन गद्दी, मो. नईम टेलर, वसीम खान बबलू, अनूप कुमार, बिरज मोहन, सागर कुमार, जाहिद रजा, मोहन साहू सहित सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे। अंत में देश और राज्य में अमन-चैन, तरक्की, भाईचारे और इंसानियत की भलाई के लिए सामूहिक दुआ की गई।

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