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थैलेसीमिया/सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष दिव्यांगता की नीति बनाकर सम्पूर्ण लाभुक बनाया जाए।

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भारत सरकार का दिव्यांगता पर विशेष कार्यरत संस्था Composite Regional Centre (CRC) “सीआरसी” रांची के निदेशक श्रीमान सूर्यकांत प्रसाद महोदय से बीते कल रांची स्थित नामकुम में उनके कार्यालय में “लहू बोलेगा” रक्तदान संगठन रांची एवं झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन के नदीम खान ने झारखंड के थैलेसीमिया/सिकल सेल एनीमिया/अप्लास्टिक एनीमिया के पीड़ित दिव्यांगता के 21 कैटेगरी से एक में आते है पर इनके लिए विशेष दिव्यांगता की व्यवहारिक/तार्किक नीति बनाने की आवश्यकता है एवं क्रियान्वयन में सुधार की जरूरत है।

जैसे थैलेसीमिया/सिकल सेल के पीड़ितों की 40 से 50 प्रतिशत की दिव्यांगता यूडीआईडी कार्ड में अंकित रहता है जिससे हो यह रहा है कि थैलेसीमिया/सिकल सेल पीड़ितों को नियमित रूप से हर महीनें ब्लड चढ़ते रहने एवं बॉडी को स्टैबल रखने के लिए हर महीनें हजारों की दवाई का सेवन करने के बाद भी पीड़ितों में पोलियो जैसी स्थिति,पेर छोटा-बड़ा होना,बैठने में दिक्कत,कुल्हे में दिक्कत,चलने फिरने में असमर्थ,हाथ में दिक्कत,पेट फूलना,स्पलीन बड़ा हो जाना,सांस लेने में दिक्कत,आंखें बड़ी-बड़ी होना,पूरे शरीर में असहनीय पीड़ा,चेहरा बदल जाना जैसे अनगिनत असहनीय पीड़ा होते रहती है,अब इन्हें दिव्यांगता क़ानून अनुसार सीआरसी से आपने लिए सहयोग चाहिए तो प्रतिशत अनुसार नही मिलेगा। थैलेसीमिया-सिकल सेल के पीड़ितों को विशेष दिव्यांगता की कैटेगरी/सूची बनाई जाए। बिहार सरकार के तर्ज़ पर झारखंड में भी दिव्यांगता क़ानून को फ़ोकस कर थैलेसीमिया पर प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा जाए।

अब इस बीमारी की वजह से कुछ पीड़ित स्कूल/कॉलेज से ड्रॉपआउट है,कुछ पढ़ रहे है,इस बीमारी की वजह से कुछ पीड़ित के पिता एवं माता को नौकरी पर हटा दिया गया है बीमारी में स्कूल/कॉलेज/नौकरी से अमानवीय/अनैतिक भाषा का उपयोग कर अपमानित किया जाता है इस उपयुक्त आदेश जारी किया जाए।

इनको स्थाई भारतीय रेलवे कंसेशन पास दिव्यांगता के तर्ज़ पर दिया जाए,जो इन्हें नही दिया जाता है। इस प्रस्ताव बनाकर भेजा जाए या आदेश दिया जाए।
असम की तर्ज़ पर केवल यूडीआईडी कार्ड होने से ही सरकार के सभी उपयुक्त स्कीमों का लाभुक बनाया जाए।

थैलेसीमिया/सिकल सेल एनीमिया/अप्लास्टिक एनीमिया के पीड़ित होने की वजह से पीड़ित की माँ को सामाजिक/परिवारिक रूप से अमानवीय/अनैतिक से अपमानित कर एकल महिला की रूप में पहुँचा दिया गया है जो अब अलग या आपने माईके में रहती है,इस मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए उपयुक्त आदेश और सरकारी योजनाओं का लाभुक बनाया जाए।
थैलेसीमिया/सिकल सेल एनीमिया/अप्लास्टिक एनीमिया के हर स्तर के मुद्दों के लिए विशेष कैम्प लगाया जाए।

देश में थैलेसीमिया/सिकल सेल एनीमिया में झारखंड दूसरा सबसे बड़ा राज्य है जिसपर फ़ोकस कर इनके दिव्यांगता एवं उनके रोजमर्रे के जीवंत मुद्दों पर ध्यानकर्षण हो।

सीआरसी निदेशक श्रीमान सूर्यकांत प्रसाद महोदय ने अपनी उपयुक्त टीम के साथ गम्भीरतापूर्वक सुना-समझा और कहा कि मेरी जानकारी में थैलेसीमिया/सिकल सेल एनीमिया/अप्लास्टिक एनीमिया के मुद्दें थे पर इस रूप में इसका अनुमान नही था,आपके बातचीत-चर्चा के आधार पर जो उपयुक्त होगा वह हमलोग अवश्य करेंगे और कुछ में प्रस्तावित करेंगे।

….”लहू बोलेगा” रक्तदान संगठन रांची एवं झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन….
(संस्थापक नदीम खान द्वारा जारी)

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