रोजा रखकर नन्हे रोजेदारो ने मांगी दुआ


रांची: खुदा से प्रेम और इबादत के लिए कोई उम्र नहीं होती। रमजान माह में रोजेदार रोजा रखकर खुदा की इबादत करते हैं। इसमें बच्चे भी पीछे नहीं हैं। रांची क्षेत्र में बड़ी संख्या में बच्चे भी इस बरकत के महीने में इबादत कर रहे हैं। खासकर ऐसे बच्चे अधिक उत्साहित हैं जो अपने जीवन में पहली, दूसरी बार रोजा रख रहे हैं। दिन भर रोजे में रहने के बाद वे इफ्तार कर रहे हैं। आज हम बात कर रहे रांची कर्बला के रहने वाले दानयाल हक की। जिनकी उमर 4 वर्ष है। यहया बिन हम्ज़ा, पिता अबु हम्ज़ा। पिता सैफुल हक जमीयतुल इराकीन रांची के महासचिव सह कई संस्थाओं के संरक्षक है। माता, पिता ने कहा की बच्चे जो घर में देखते हैं उसी से सीखते हैं। स्कूल जाते हैं, पर स्कूल में अन्य बच्चों को लंच करते देखकर भी उन्हें भूख महसूस नहीं होती। बच्चो का कहना है कि रोजा रखकर उसे काफी खुशी महसूस होती है। पिता सैफुल हक ने कहा कि बच्चे अपनी मां से रमजान के पूरा रोजा रखने की बात करते है। उनके मां की चिंता बढ़ जाती है, मां तो मां होती है। हमने उलेमा से सुना है कि बच्चे अपने घर से ही सीखते हैं।








