ईद की नमाज़ बाजुओं में काली पट्टी बांधकर अदा करें लोग : मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन


अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनई की शहादत एवं मासूम बच्चियों की शहादत पर सादगी के साथ ईद मनाने की अपील — सैय्यद तहज़ीबुल हसन
(मौलाना सैय्यद तहज़ीबुल हसन रिज़वी)
प्रदेश अध्यक्ष
शिया पर्सनल लॉ बोर्ड, झारखंड प्रदेश
आज शिया पर्सनल लॉ बोर्ड, झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष सैय्यद तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने एक अहम बयान जारी करते हुए समस्त मुस्लिम समाज एवं इंसानियत से जुड़े लोगों से भावुक अपील की है कि इस वर्ष ईद-उल-फितर को ग़म, सादगी और जिम्मेदारी के एहसास के साथ मनाया जाए।
उन्होंने कहा कि रहबरी मक़ाम की अज़ीम शख्सियत, अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनई की शहादत और मासूम बच्चियों व बेगुनाह इंसानों की शहादत ने पूरी दुनिया की इंसानियत को गहरे सदमे में डाल दिया है। यह केवल एक व्यक्ति या एक देश का नुकसान नहीं, बल्कि पूरी उम्मत और मानवता के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
सैय्यद तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने अपील करते हुए कहा कि इस ग़म की घड़ी में ईद की पारंपरिक खुशियों और दिखावे से दूर रहना ही सच्ची इंसानियत का परिचय होगा।
उन्होंने कहा कि लोग ईद की नमाज़ सादगी के साथ अदा करें और अपने बाजुओं में काली पट्टी बांधकर नमाज़ के लिए जाएं, ताकि यह एक प्रतीक के रूप में दुनिया को यह संदेश दे सके कि हम अपने रहबर और मासूम शहीदों के ग़म में बराबर के शरीक हैं।
उन्होंने या भी कहा कि यह ईद केवल खुशी का त्योहार नहीं, बल्कि इंसानियत के दर्द को महसूस करने और उसके साथ खड़े होने का भी मौका है। हमें चाहिए कि हम इस बार ईद को सादगी से मनाएं, नए कपड़ों और अनावश्यक खर्च से बचें, और अपने दिलों में शहीदों के लिए दुआ और इंसानियत के लिए दर्द जिंदा रखें।
मौलाना तजीबुल हसन ने आगे कहा कि मासूम बच्चियों और बेगुनाहों की शहादत ने हर संवेदनशील दिल को झकझोर दिया है। ऐसे समय में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम एकजुट होकर उनके ग़म में शरीक हों, अमन और इंसाफ के लिए अपनी आवाज बुलंद करें और दुनिया को यह बताएं कि इंसानियत आज भी जिंदा है।
अंत में सैय्यद तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे इस संदेश को व्यापक रूप से फैलाएं, जरूरतमंदों की मदद करें और इस ईद को सादगी, सब्र और इंसानियत के नाम समर्पित करें।








