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खामेनेई की मौत पर रांची के सुन्नी-शिया का एकजुट शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन

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रांची में सुन्नी शिया एक साथ उतरे सड़कों पर, उमड़ा जन सैलाब

रांची: अमेरिका और इजरायल ने जिस तरह से ताबड़तोड़ हमले किए और इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर 86 वर्षीय अयातुल्लाह अली खामेनेई ने जान गंवाई उसे लेकर पूरे देश में आक्रोश है। खामेनेई की मौत को लेकर झारखंड की राजधानी रांची के मुस्लिम समुदाय में आक्रोश है। आज 6 मार्च 2026 को कांके सैयद शाहरुख हसन रिजवी के आवासीय कार्यालय गढ़हुसीर में हजारों की संख्या में लोग जुमा नमाज़ के बाद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।

ऐसा पहली बार है जब शिया और सुन्नी धार्मिक मतभेदों को भुलाकर शहीद अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन पर साथ में शोक जताते नजर आए। रमजान के पवित्र महीने में खामेनेई की शहादत ने मुस्लिम जगत के लाखों लोगों को गहरा शोक पहुंचाया है। वहीं इस ऐतिहासिक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए झारखंड राज्य हज समिति के सदस्य हजरत मौलाना सैयद तहजीबुल हसन रिजवी ने कहा कि नमरुद ने खुदा होने का ऐलान किया था, पैगंबर इब्राहिम अकेले खड़े रहे, फिरौन ने भी खुदा होने का ऐलान किया, पैगंबर मूसा अकेले खड़े रहे, ज़ालिम यज़ीद के सामने हजरत इमाम हुसैन अकेले खड़े रहे। आज के दौर में उम्मत मुस्लिमा का वह निडर लीडर जो पैगंबर इब्राहिम, पैगंबर मूसा और इमाम हुसैन के इतिहास को फिर से जिंदा कर दिया है, वह सुप्रीम लीडर सैय्यद अयातुल्लाह अली खामेनेई हैं।

मौलाना तहजीबुल हसन रिजवी ने कहा कि हम ईरान को सलाम करते हैं कि पूरी दुनिया के पाबंदी के बावजूद उसने न सिर्फ इकॉनमी चलाई बल्कि डिफेंस को भी मजबूत बनाया, साइंस और टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रहा है, ईरान ने विभिन्न फील्ड में अपना लोहा मनवाया है। मौलाना तहजीबुल हसन ने कहा कि इस्लाम में जान देना, शहीद होना हार की निशानी नहीं बल्कि जीत की निशानी है।पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने परिवार और साथियों के साथ कर्बला के मैदान में शहादत दी और कयामत तक विजेता बने रहे। वहीं झारखंड समाजवादी पार्टी शिक्षक सभा के अध्यक्ष युवा समाजसेवी सैयद शाहरुख हसन रिजवी ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान हमेशा से भारत के अच्छा दोस्त रहा है। अभी ईरान पर कठिन समय आया है, एक दोस्त होने के नाते भारत ईरान के साथ खड़ा है।

ईरान कठिन समय में भारत के साथ रहा, चाहे तालिबान का मसला हो या फिर ओआइसी में भारत का पक्ष कश्मीर के मुद्दे पर रखना हो तो ईरान ने हमेशा भारत का साथ दिया। वैश्विक मंदी(2008) में ईरान ने भारत को न केवल सस्ता तेल दिया बल्कि भारत मुद्रा में दिया। 2014 में तिकरित इराक में भारतीय नर्सों आईएस आईएस आतंकी संगठन ने बंधक बना कर रखा था उस समय के आईअरजीसी के कमांडर शहीद कासिम सुलेमानी ने उन नर्सों से आईएस आईएस के चंगुल से छुड़ा कर हिंदुस्तान इज्जत के साथ भेजा। ऐसे कठिन समय में भारतीय लोगों को भी ईरान के साथ खड़ा होना चाहिए। पत्रकार के सवाल के अयातुल्लाह खामनाई के मौत पर हिंदुस्तान में मातम कियू? उसका जवाब देते हुए शाहरुख हसन रिजवी ने कहा कि मुस्लिम समाज का एक धार्मिक रिश्ता है अयातुल्लाह खामनाई से, जिस तरह से ईसाइयों के लिए पोप है उसी तरह से अयातुल्लाह खामनाई है। उन्होंने कहा कि आज धरती पर हुर्रियत के सभी लोग सुप्रीम लीडर सैय्यद अली खामेनेई के शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने हिम्मत का रास्ता अपनाया। जिन्होंने अपने से कहीं ज़्यादा बड़े दुश्मनों को चुनौती दी और उनको बेनकाब किया।

शाहरुख रिजवी ने कहा कि हज़रत इमाम खुमैनी ने ईरान में ऐसी इस्लामिक क्रांति लाई, जिसने पूरी दुनिया की आँखें खोल दीं, आज का झूठ और अविश्वास इससे बहुत परेशान है। शाहरुख ने आगे कहा कि फ़िलिस्तीन के गाज़ा में हमारे एक लाख से ज़्यादा भाई-बहन, मासूम बच्चे मारे गए। उस समय ह्यूमन राइट्स के चैंपियन कहाँ थे? सीज़फ़ायर के बावजूद, इज़राइल हर दिन दबे-कुचले फ़िलिस्तीनियों पर बमबारी कर रहा है, लेकिन सब मूक दर्शक बने हुए हैं। वहीं नूरानी मस्जिद के इमाम मौलाना जैनुल आबिदीन ने कहा अफसोस है कि ऐसे हालत में भी मुसलमानों में बिखराव है और इसका फायदा अमरीका और इजरायल उठा रहा है।

उन्होंने मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की। इस मौके पर शरीफ अंसारी, रजब अंसारी, हाफिज फैयाज, सैफुल्लाह अंसारी,अंजर अंसारी, मोईज अंसारी, ईदुल अंसारी, माजिद अंसारी, गुल मो अंसारी, शजर हसन रिजवी, सैयद समर अली, जुहैर बाकर, नदीम रिजवी, हबीब हैदर, अफ़ज़ल दुर्रानी, सुहैल सईद, कासिम अली, इकबाल हुसैन, समेत सैकड़ो लोग मौजूद थे।

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