मत्स्य उत्पादन में झारखंड को आत्मनिर्भर बनाने की एनएफडीबी की सराहनीय पहल: अब झारखंड में भी आंध्रप्रदेश की तर्ज पर होगा मछलीपालन


मत्स्य कृषकों का 14 सदस्यीय दल तीन दिवसीय आन्ध्र-प्रदेश भ्रमण के बाद रांची लौटा
रोजगार का एक सशक्त जरिया है मत्स्य पालन: डॉ.एचएन द्विवेदी

रांची। अब झारखंड में भी आंध्र प्रदेश की तर्ज पर मछली पालन किया जाएगा।
इस दिशा में नेशनल फिशरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनएफडीबी) ने पहल की है।
एनएफडीबी के सहयोग से गत सात से नौ अगस्त तक झारखंड के 14 सदस्यीय मत्स्य कृषकों का दल आंध्र प्रदेश के विभिन्न जिलों में दौरा कर मछली उत्पादन की आधुनिकतम तकनीकों से अवगत हुआ। झारखंड मत्स्य निदेशालय के अधिकारियों के मुताबिक राज्य को मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए मत्स्य निदेशालय द्वारा निरंतर प्रयास जारी है। मत्स्य विभाग द्वारा राज्य के मत्स्य कृषकों को केंद्र व राज्य संपोषित योजनाओं से आच्छादित कर लाभान्वित किया जा रहा है। अलग राज्य गठन के बाद झारखंड में मत्स्य उत्पादन का ग्राफ लगातार ऊपर बढ़ रहा है। मछली उत्पादन में झारखंड आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।

मत्स्य निदेशालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस दिशा में नेशनल फिशरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनएफडीबी) का भी सहयोग मिलता रहा है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि
झारखंड सरकार के कृषि,पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के दिशा-निर्देश के आलोक में एनएफडीबी, हैदराबाद के सहयोग से मत्स्य कृषकों को आंध्रप्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कराया गया। मत्स्य कृषकों ने आंध्रप्रदेश के एलुरु, कैक्लूरू, भीमावरण, मछलीपट्टनम आदि जगहों का भ्रमण किया। मत्स्य कृषक इससे काफी उत्साहित हुए तथा आन्ध्र प्रदेश की तर्ज पर झारखंड में भी तालाबों में मछली पालन करने का संकल्प लिया। आंध्रप्रदेश के एलुरु के सहायक मत्स्य निदेशक बी. राजकुमार के सहयोग से मत्स्य कृषकों को आन्ध्र प्रदेश के विभिन्न जगह का भ्रमण कराया गया।
मत्स्य कृषकों के आंध्र प्रदेश से लौटकर रांची वापस आने पर मत्स्य निदेशालय द्वारा स्वागत किया गया।

निदेशक मत्स्य डॉ.एचएन द्विवेदी ने कहा कि एनएफडीबी के सहयोग से अंतरराज्यीय भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन मत्स्य कृषकों के लिए काफी सहायक होता है। मछली उत्पादन में देश के अन्य अग्रणी राज्यों के भ्रमण से वहां के मत्स्य कृषकों के अनुभवों का लाभ झारखंड के मत्स्य पालकों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।
उक्त जानकारी मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र शालीमार (धुर्वा) के मुख्य अनुदेशक प्रशांत कुमार दीपक ने दी।
