विषय: UAPA एवं PSA कानूनों को तत्काल समाप्त करने की संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मांग


अंतरराष्ट्रीय प्रेस विज्ञप्ति दिनांक: 19 मार्च 2026 स्थान: लखनऊ / जौनपुर, भारत
विषय: UAPA एवं PSA कानूनों को तत्काल समाप्त करने की संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मांग
लखनऊ/जौनपुर: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं जौनपुर सदर के पूर्व विधायक जनाब मोहम्मद अरशद खान ने Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) एवं Public Safety Act (PSA) की कड़ी आलोचना करते हुए इन्हें असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक तथा मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाला कानून बताया है।
उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि मीसा (MISA), टाडा (TADA) और पोटा (POTA) जैसे कानूनों का दुरुपयोग कर सरकारों ने असहमति को दबाने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का काम किया, जिसके चलते अंततः इन कानूनों को समाप्त करना पड़ा। आज वही स्थिति UAPA और PSA के रूप में दोहराई जा रही है।
मोहम्मद अरशद खान ने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, मणिपुर एवं असम का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में इन कठोर कानूनों का सबसे अधिक दुरुपयोग हुआ है। उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल जम्मू-कश्मीर में ही लगभग 10,000 लोग वर्षों से बिना सुनवाई के जेलों में बंद हैं, जो न्याय और संविधान की आत्मा के विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का इन कानूनों के माध्यम से खुला उल्लंघन किया जा रहा है। “जमानत नियम है और जेल अपवाद” का सिद्धांत, जिसे न्यायपालिका ने बार-बार स्थापित किया है, UAPA और PSA के प्रावधानों द्वारा कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने भीमा-कोरेगांव मामले का उल्लेख करते हुए अधिवक्ता सुरेंद्र गाडलिंग सहित अन्य बंद लोगों को तत्काल जमानत देकर रिहा करने की मांग की।
इसके अतिरिक्त, दिल्ली दंगों के मामलों में बिना ठोस साक्ष्य के UAPA के तहत लगभग 6 वर्षों से जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम, इशरत सिद्दीकी, खालिद सैफी, ताहिर हुसैन आदि व्यक्तियों की निरंतर हिरासत को उन्होंने न्याय के साथ गंभीर अन्याय बताया और केंद्र सरकार से उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।
मोहम्मद अरशद खान ने केंद्र सरकार से निम्नलिखित मांगें कीं:
UAPA एवं PSA के तहत देशभर में बंद सभी व्यक्तियों को तत्काल जमानत पर रिहा किया जाए।
इन कानूनों के अंतर्गत दर्ज सभी मामलों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध समीक्षा कराई जाए।
UAPA एवं PSA जैसे दमनकारी कानूनों को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र में असहमति (dissent) को अपराध नहीं माना जा सकता और न ही किसी कानून का उपयोग नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचलने के लिए किया जाना चाहिए।
अंत में उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, नागरिक समाज एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं से अपील की कि वे इस गंभीर मुद्दे का संज्ञान लें और पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाएं।
जारीकर्ता:
मोहम्मद अरशद खान
राष्ट्रीय सचिव, समाजवादी पार्टी
पूर्व विधायक, जौनपुर सदर








