रांची अंजुमन चुनाव : नफरत नहीं, एकता की राह चुनें:नेहाल अहमद


रांची :ज़िन्दगी बहुत छोटी है—ना किसी से नाराज़ होकर जीना सही है, ना किसी को नाराज़ करके। असल खुशी तो इसी में है कि हम सबको साथ लेकर चलें और अपने दिल में मोहब्बत और अपनापन बनाए रखें। जब हम एक-दूसरे को समझते हैं और सम्मान देते हैं, तभी समाज में सच्ची शांति और तरक्की आती है।
आज जो आपसी मतभेद और खींचतान चल रही है, वह किसी के लिए भी फायदेमंद नहीं है। अंजुमन इस्लामिया का चुनाव पहले ही आठ महीने देरी से हो रहा है, ऐसे में और विवाद बढ़ाना सही नहीं। बेहतर यही होगा कि सभी लोग मिल-बैठकर समझदारी से एक चुनाव संयोजक चुनें और निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न कराएं। जो लोग सिर्फ बातें करते हैं लेकिन जिम्मेदारी निभाने से पीछे हटते हैं, उनके पीछे समय बर्बाद करना भी ठीक नहीं।
हमें यह समझना होगा कि जैसे एक पेड़ की खूबसूरती उसके फूल और पत्तियों से होती है, वैसे ही इंसान की असली खूबसूरती उसके विचार और व्यवहार से झलकती है। अगर हमारे विचार सकारात्मक हों और व्यवहार अच्छा हो, तो हर मुश्किल का हल आसानी से निकल सकता है।
इसलिए नफरत छोड़कर एकता का रास्ता अपनाइए, आपसी भाईचारे को मजबूत कीजिए और मिलकर फिर से एक नया चुनाव कमिटि का निर्माण कीजिए। यही असली जीत है, और यही इंसानियत की पहचान भी।








