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मत्स्य उत्पादों की स्वच्छता व जलकृषि प्रबंधन विषयक प्रशिक्षण का शुभारंभ, बिक्रय स्थल पर स्वच्छता रखें: मनोज कुमार ठाकुर

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रांची। केन्द्रीय माति्स्यकी प्रौद्योगिकी संस्थान के मुम्बई केन्द्र द्वारा दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का विषय मत्स्य उत्पादों का स्वच्छता और उसके देखभाल तथा सर्वोत्तम जलकृषि प्रबंधन रखा गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मत्स्य विभाग के उप मत्स्य निदेशक मनोज कुमार ठाकुर ने अपने संबोधन में मछलियों के पकड़ने से लेकर विपणन तक स्वस्थ एवं स्वच्छ परिवेश में ध्यान रखने को कहा। किसानों को मछली का बेहतर दाम मिले, इसके लिए बिक्री स्थल पर साफ-सफाई रखने व मछलियों के मूल्य संवर्धित उत्पाद के बारे में जानकारी दी। इस प्रशिक्षण में सीआइएफटी, मुंबई से आए हुए वरीय वैज्ञानिक डाॅ. अभय कुमार ने किसानों को प्रस्तुति दी, जिसमें प्रसंस्करण तथा बिक्रेताओं को दिशा निर्देश की जानकारी दी। मछलियों को संरक्षित करने हेतु तापमान पांच डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे रखने की सलाह दी।
इस अवसर पर जिला मत्स्य पदाधिकारी जयंत रंजन, सहायक मत्स्य निदेशक गीतांजली कुमारी, सीआइएफटी के तुलसी राम बाघमारे (तकनीकी पदाधिकारी) भी मौजूद रहे।

*केंद्रीय मात्स्यिकी तकनीक संस्थान (सीआइएफटी)की स्थापना वर्ष 1957 में की गई। इसके चार क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र हैं जो मुम्बई, विशाखापट्टनम, वेरावल तथा कोचीन में है। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में अंतिम दिन इनपुट में जाल, फीड, लाइव जैकेट आइस बाक्स का वितरण किया जाना है। कार्यक्रम का संचालन मंजूश्री तिर्की, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रशांत कुमार दीपक, (मुख्य अनुदेशक) द्वारा किया गया।

किसान प्रशिक्षण केंद्र ज्ञान का मंदिर

मत्स्य निदेशालय के उप मत्स्य निदेशक मनोज कुमार ठाकुर ने किसानों को बताया कि किसान प्रशिक्षण केन्द्र ज्ञान का मंदिर है, जहां मछलीपालन तथा उससे संबंधित जानकारी दी जाती है, प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। किसानों को इस अवसर का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने डे-टू-डे लाइफ में इस प्रशिक्षण की जानकारी को अपने जीवन शैली में उतारने को कहा।
गीतांजली कुमारी ने कहा कि प्रशिक्षण केन्द्र में नये-नये विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहते हैं। उनमें से मत्स्य मछली पकड़ने की विधि से लेकर विपणन तक साफ सुथरा, स्वच्छता का कैसे ध्यान रखें इस पर बल दिया।
मूल्य संवर्धित उत्पाद जैसे मछली का अचार, पापड़ कटलेट, फीश फिंगर, फिश फिलेट, फिश स्टीक आदि के बारे में बताया गया।
इस अवसर पर महेशपुर मत्स्यजीवी सहयोग समिति गेतलसूद, अनगड़ा, पतराटोली मत्स्यजीवी सहयोग समिति, धुर्वा डैम के करीब 55 किसान उपस्थित थे। उक्त प्रशिक्षण झारखंड राज्य के अनुसूचित जाति के मत्स्य कृषकों के लिए आईसीएआर-सीआइएफटी, कोचीन के सहयोग से किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आईसीएआर-सीआइएफटी, कोचीन के प्रिंसिपल सह वैज्ञानिक और एससीएसपी के नोडल अधिकारी एस सुरेश तथा आईसीएआर -सीआइएफटीके निदेशक डॉ .जाॅर्ज निनान के नेतृत्व में किया गया।

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