मत्स्य निदेशालय की सराहनीय पहल:: दुमका के बांकीबेरा जलाशय में महाझींगा प्रजाति ‘मैक्रोब्रेकियम रोजन्बर्गी’ के बीजों का संचयन


*महाझींगा पालन अपनाएं,आमदनी बढ़ाएं : डाॅ.एके दास
*स्वरोजगार का सशक्त साधन है महा झींगा पालन: अमरेन्द्र कुमार

रांची। झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन (मत्स्य) एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के निर्देशानुसार आदिवासियों की जीविका में सुधार के लिए मत्स्य निदेशालय की ओर से राज्य के विभिन्न जलाशयों में महाझींगा पालन हेतु योजनाएं संचालित है। यह योजना आइसीएआर-सीआइएफआरआई, बैरकपुर (कोलकाता) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.अर्चन कांति दास के नेतृत्व व मार्गदर्शन में संचालित की गई।

इस संबंध में झारखंड सरकार के मत्स्य निदेशालय के निदेशक अमरेंद्र कुमार ने मंगलवार को बताया कि जलाशयों में महाझींगा पालन से आदिवासियों की जीविका में सुधार होगा। उनकी जीवन शैली बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि अभी तक मत्स्य कृषक जलाशय में सिर्फ मछली पालन करते थे, लेकिन अब छोटे-छोटे जलाशयों में मछली के साथ महाझींगा का भी पालन कर सकेंगे। इससे मत्स्य कृषक अपनी आर्थिक स्थिति में मजबूत कर सकते हैं। गौरतलब है कि पहले झारखंड में सिर्फ तीन जलाशयों, घाघरा जलाशय हजारीबाग, केलाघाघ जलाशय, सिमडेगा तथा मसरिया जलाशय, गुमला में महाझींगा पालन किया जा रहा था, जिसका परिणाम काफी बेहतर व उत्साहवर्धक रहा। महाझींगा पालन में संतोषप्रद प्रदर्शन देखते हुए जिला के सभी डीएफओ ने अन्य छोटे-छोटे जलाशयों में महाझींगा पालन करने के प्रति अभिरुचि दिखाई।

तत्पश्चात राज्य के छह अन्य नए जलाशयों, जिसमें बचरा (लातेहार), करंजी और नौरंगा जलाशय (रांची), नंदनी (लोहरदगा), धनसिंह जलाशय (गुमला) तथा बांकीबेरा जलाशय (दुमका) में भी महाझींगा पालन का कार्य प्रारंभ किया गया। 30 मार्च (सोमवार) को बांकीबेरा जलाशय, दुमका में 2,34,000 संख्या में महाझींगा के बीजों का संचयन किया है। इसके साथ ही विभाग द्वारा जलाशय के किसानों के लिए महाझींगा पालन हेतु आहार , मिनरल मिक्सर और जियोलाइट भी उपलब्ध कराया गया। गौरतलब है कि महाझींगा के बीज संचयन में सिफ़री के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.एके दास, नवराजन तिर्की, जिला मत्स्य पदाधिकारी दुमका, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी सहित अन्य कर्मी तथा जलाशय समिति के मत्स्य कृषक उपस्थित रहे। डॉ.दास ने कहा कि महाझींगा पालन कर किसान बंधु अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे। महाझींगा की मांग बढ़ी है। महाझींगा का पालन बढ़ाकर किसान बाजार में बेचेंगे तो अच्छा दाम मिलेगा, आर्थिक उन्नति के साथ ही अपने जीवन परिवर्तन ला सकते हैं। स्वरोजगार से जुड़ सकते हैं।
उक्त जानकारी मत्स्य निदेशालय के मुख्य अनुदेशक प्रशांत कुमार दीपक ने दी।








