“भाजपा शासन में लूटी गई आदिवासी जमीन पर आज घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं बाबूलाल मरांडी : आलोक दुबे”


“CNT एक्ट को कमजोर करने वालों को उपदेश देने का नैतिक अधिकार नहीं : कांग्रेस”
“हेमंत सरकार आदिवासी अधिकारों के साथ, भाजपा फैला रही भ्रम : आलोक दुबे”

“पहले अपने कार्यकाल के भूमि घोटालों पर जवाब दे भाजपा : झारखंड कांग्रेस”
“आदिवासी जमीन की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़क से सदन तक लड़ेगी : आलोक दुबे”
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के हालिया बयान को पूरी तरह भ्रामक, राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित और तथ्यों से परे बताया है।
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि आदिवासी समाज की जमीन, अधिकार और अस्मिता पर यदि किसी ने संगठित रूप से प्रहार किया है, तो उसकी शुरुआत भाजपा शासनकाल में हुई थी। आज वही लोग नैतिकता का चोला ओढ़कर बयानबाज़ी कर रहे हैं, जिनके कार्यकाल में सीएनटी और एसपीटी एक्ट को कमजोर करने के प्रयास हुए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में, ‘जल, जंगल और जमीन’ की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आदिवासी भूमि से जुड़े मामलों में न्यायालयों के आदेशों का सम्मान करते हुए प्रशासनिक स्तर पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। कुछ मामलों में वर्षों से लंबित विवादों को वर्तमान सरकार के खाते में डालना सरासर राजनीतिक छल है।
दुबे ने कहा कि अरगोड़ा अंचल अथवा अन्य किसी भी क्षेत्र में यदि किसी व्यक्ति को न्याय मिलने में विलंब हुआ है, तो कांग्रेस यह मानती है कि कानून के दायरे में रहते हुए त्वरित समाधान होना चाहिए। लेकिन इस विषय को लेकर सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाना भाजपा की आदिवासी समाज को भ्रमित करने की पुरानी रणनीति का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासनकाल में रांची सहित पूरे राज्य में बिल्डर लॉबी को खुली छूट दी गई, आवास बोर्ड और गैर-मजरुआ भूमि पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं, जिन पर आज तक भाजपा चुप है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि पहले भाजपा अपने शासनकाल के भूमि घोटालों पर श्वेत पत्र जारी करे, उसके बाद दूसरों पर उंगली उठाए।
अंत में आलोक कुमार दुबे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करती रहेगी और किसी भी कीमत पर आदिवासी जमीन की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।








