लोकतंत्र पर हमला है राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने की साजिश : आलोक कुमार दुबे


अपराधियों को बचाने वाली भाजपा दूसरों को देशभक्त होने का सर्टिफिकेट न दे : कांग्रेस
राहुल गांधी से डरती है भाजपा, इसलिए संसद में बोलने तक नहीं देती
निशिकांत दुबे पहले अपने आका मोदी–शाह से इस्तीफा दिलवाएं : आलोक दुबे
अमेरिका के आगे सरेंडर करने वालों को देशभक्ति की बात शोभा नहीं देती
ऐप्सटीन फ़ाइल पर चुप्पी क्यों? मोदी सरकार दे देश को जवाब : आलोक कुमार दुबे
ऐप्सटीन फ़ाइल से घबराई भाजपा, राहुल गांधी पर हमला कर रही है : कांग्रेस
सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी करने वाले निशिकांत दुबे लोकतंत्र का पाठ पढ़ा रहे हैं!
विवादित बयानों के ‘रिकॉर्ड होल्डर’ निशिकांत दुबे को पहले जवाब देना चाहिए
रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दिए गए बयान और पेश किए गए मोशन को लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है।
आलोक दुबे ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब भाजपा ने राहुल गांधी की आवाज दबाने की कोशिश की हो। इससे पहले भी उन्हें गलत तरीके से बर्खास्त किया गया था, लेकिन देश की न्यायपालिका ने सच्चाई के साथ खड़े होकर उनकी सदस्यता बहाल की। यह साबित करता है कि सच को कितनी भी साजिशों से दबाया जाए, अंततः जीत संविधान और न्याय की ही होती है।
उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, वहां रेप, मर्डर और मानवाधिकार हनन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कार्रवाई करने के बजाय भाजपा नेता अपराधियों को संरक्षण देने में विश्वास रखते हैं। ऐसे में दूसरों की देशभक्ति पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार भाजपा को नहीं है।
आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि संसद में जब भी राहुल गांधी तथ्य और सच्चाई के साथ सरकार को आईना दिखाने की कोशिश करते हैं, उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। यह दर्शाता है कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक बहस से डरती है। संवैधानिक संस्थाओं, जांच एजेंसियों और संविधान की गरिमा को तार-तार करने का काम यदि किसी ने किया है, तो वह भाजपा सरकार है।
निशिकांत दुबे खुद विवादित बयानों, गलत दावों और संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी को लेकर बार-बार सवालों के घेरे में रहे हैं, लेकिन जब सत्ता से सवाल पूछा जाता है तो सदस्यता रद्द करने जैसे हथकंडों का सहारा लिया जाता है। न्यायपालिका, पत्रकारों की गोपनीयता और संसदीय मर्यादा से जुड़े विवादों में नाम आने के बावजूद दूसरों पर देशद्रोह और नैतिकता के आरोप लगाना दोहरे मापदंडों का उदाहरण है। लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं होती; सवालों से भागना और आवाज दबाना ही असल समस्या है। पहले अपने बयानों और आचरण का हिसाब दें, फिर किसी और की सदस्यता पर उंगली उठाएँ।
उन्होंने आगे कहा कि यदि सदस्यता रद्द करने की बात की जा रही है, तो सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सदस्यता समाप्त होनी चाहिए, जिन्होंने देश की परंपरागत विदेश नीति को ताक पर रखकर अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण किया है। जो अमेरिका कहता है, वही किया जाता है। रूस जैसे पुराने मित्र देशों की अनदेखी इसका स्पष्ट उदाहरण है।
आलोक दुबे ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आ रही एप्सटीन फाइल से जुड़े खुलासों पर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा नेतृत्व को देश के सामने स्पष्टीकरण देना चाहिए। लेकिन भाजपा सवालों से डरती है, इसलिए ध्यान भटकाने के लिए राहुल गांधी पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी और देश की जनता भाजपा की इस तानाशाही सोच को कभी स्वीकार नहीं करेगी। राहुल गांधी की आवाज देश की आवाज है, और उसे दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।








