मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र में पांच दिवसीय मोती पालन सह उद्यमिता विकास प्रशिक्षण का शुभारंभ


*मत्स्य कृषकों की आर्थिक समृद्धि बढ़ाने में सहायक है मोती पालन: अमरेंद्र कुमार

रांची। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के निर्देशानुसार पांच दिवसीय मोती पालन सह उद्यमिता विकास विषयक प्रशिक्षण शुभारंभ गुरुवार को मत्स्य किसान प्रशिक्षण केन्द्र, धुर्वा, रांची में किया गया। इस अवसर पर मुख्य व्याख्याता डॉ.कमला शंकर शुक्ला, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्रकुट, अमरेन्द्र कुमार, निदेशक मत्स्य, शंभू प्रसाद यादव, उप मत्स्य निदेशक, गीतांजली कुमारी, सहायक मत्स्य निदेशक (अनुसंधान), डाॅ रितेश शुक्ला, सहायक प्राध्यापक प्राणीशास्त्र विभाग, संत जेवियर कॉलेज, रांची, बुधन सिंह पूर्ति, प्रगतिशील मोतीपालक के साथ-साथ झारखंड के विभिन्न जिलों से आए 75 किसान उपस्थित थे। इस अवसर पर निदेशक मत्स्य अमरेन्द्र कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि मोती एक रत्न है, जो पुरातन काल से इस धरती पर पाया जा रहा है। परन्तु पहले समुद्र, नदियों आदि में ही मिलते थे। पर्यावरण प्रदूषण आदि के कारण प्राकृतिक श्रोतों से इसकी उपलब्धता घटने लगी। मांग तथा उत्पादन को देखते हुए इस पर काफी काम करने की आवश्यकता है।

इसी को देखते हुए मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा हजारीबाग को मोती पालन का कलस्टर जिला घोषित किया गया है। मोती पालन पर प्रशिक्षित कर किसानों को मछली पालन के साथ-साथ मोती उत्पादन कर नये आयाम से जोड़ना है। उन्होंने सभी किसानों को इस प्रशिक्षण का लाभ उठाने तथा इसका प्रचार प्रसार करने पर आह्वान किया।
मौके पर शंभु प्रसाद यादव, उप मत्स्य निदेशक ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के उपरान्त मोती की खेती हेतु प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना तथा राज्य योजना का
लाभ उठायें। कलस्टर में मोती की खेती करें, मोती की उत्पादन के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती है। डोभा/सिमेन्टेड टैंक, घर के आंगन में भी इसका उत्पादन किया जा सकता है। मोती पालन सीख कर दक्षता हासिल करें तथा अपने को स्वनियोजित करते हुए साथ में अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़े।
डॉ. कमला शंकर शुक्ला, प्रधान वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र,
चित्रकूट ने मोती के बारे विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह एक ऐसा रत्न है जो माईनिंग खनन के द्वारा नहीं मिलता है। इसके उत्पादन के लिये सीप की आवश्यकता पड़ती है। जो इसके पालन में लगे हुए हैं, वे प्रत्येक किसान अपने आप में एक रत्न हैं। मोती पालन का प्रशिक्षण का उद्देश्य सिर्फ प्रमाण पत्र प्राप्त करना ही नहीं होना चाहिए, बल्कि मोती पालन में कौशल प्राप्त करना एवं दक्षता हासिल करना उद्देश्य होना चाहिए। अतः इस महत्वपूर्ण समय का लाभ उठाएं। मोती पालन के साथ साथ मोती का उत्पादन, प्रोसेसिंग, औजार निर्माण, मोती भस्म, कॉस्मेटिक/केल्सियम पाउडर जैसे अन्य सामग्रियां तथा सीप के कवच से साज-सज्जा के सामान बनाने पर भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकते है। अतः मोती पालन से एक आदमी अपने साथ दस लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से जोड़ सकते है। मंच का संचालन मंजुश्री तिर्की, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन मुख्य अनुदेशक प्रशांत कुमार दीपक ने किया।








