आलिम एवं फाज़िल डिग्री की मान्यता बरकरार रखने के मुद्दे पर झारखण्ड राज्य अल्पसंख्यक कल्याण आयोग के उपाध्यक्ष से मिलकर उर्दू शिक्षक संघ ने दिया सुझाव


सरकार से मिलकर इस मामले का जल्द करेंगे निराकरण ताकि उर्दू अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके : ज्योति सिंह मथारू
जैक द्वारा दी गई आलिम व फाज़िल की डिग्री की मान्यता सुनिश्चित करे सरकार नहीं तो होगा व्यापक आंदोलन : उर्दू शिक्षक संघ
रांची, 20 नवम्बर, 2025,
झारखंड राज्य उर्दू शिक्षक संघ का एक शिष्टमंडल केंद्रीय महासचिव अमीन अहमद के नेतृत्व में झारखण्ड राज्य अल्पसंख्यक कल्याण आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह मथारू से मिलकर आलिम फाज़िल डिग्री की मान्यता दिये जाने की दिशा में सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिए जाने पर विस्तार पूर्वक इस गंभीर मामले को रखा गया।
शिष्टमंडल में मुख्यरूप से केंद्रीय नेतृत्व में मो० फखरुद्दीन, शहज़ाद अनवर, एनामुल हक़, मक़सूद जफर हादी शामिल थे।
संघ ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस पर अब तक संज्ञान नहीं लिया जाना अल्पसंख्यक समुदाय के लिए अन्याय के साथ साथ भेदवाव पूर्ण रवैया है। पूर्व में ही माननीय मुख्यमंत्री सहित संबंधित मंत्री एवं विभागीय पदाधिकारियों को मांग पत्र सौंपकर उर्दू टेट (6–8) सफल अभ्यर्थियों की काउंसलिंग और फाइनल सूची जारी करने में हो रही बाधा पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
झारखण्ड राज्य अल्पसंख्यक कल्याण आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह मथारू ने कहा कि इस गंभीर मामले एवं अभ्यर्थियों के जायज मांग का निराकरण जल्द सरकार से मिलकर करेंगे।
संघ के महासचिव अमीन अहमद ने कहा कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने आलिम और फ़ाज़िल की डिग्रियों को लेकर विधि विभाग से मंतव्य मांगा था, जिस पर सरकार द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया जो सरासर अल्पसंख्यक समाज के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में ही झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) के ज्ञापन संख्या 3233/06, दिनांक 16.09.2006 के माध्यम से आलिम एवं फ़ाज़िल की डिग्रियों को मान्यता दी जा चुकी है। यह परीक्षाएँ झारखंड अधिविद्य परिषद, रांची द्वारा राज्य सरकार की देखरेख में कराई जाती हैं। इसके बावजूद सरकार के ही विधि विभाग द्वारा आपत्ति जताना विरोधाभास और दुर्भाग्यपूर्ण है।
ज्ञात हो कि इसके पूर्व झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग ने दिनांक 19.04.2023 के अपने अधिसूचना द्वारा स्नातक प्रशिक्षित उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति आलिम और फाज़िल डिग्री धारी (झारखण्ड अधिविद्य परिषद से प्राप्त) अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर चुकी है।
अमीन अहमद ने कहा कि JSSC ने उर्दू टेट (6–8) सफल अभ्यर्थियों की पहली बार काउंसलिंग तो कराई, लेकिन अंतिम सूची जारी करने से रोक दिया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि “मौलवी परीक्षा के बाद स्नातक अनिवार्य है।” इस पर संघ का कहना है कि यह तर्क पूरी तरह निराधार एवं अनुचित है और 2006 की अधिसूचना का सरासर उल्लंघन करता है।
संघ आरोप लगाया कि “यह पूरा मामला अल्पसंख्यक समुदाय के योग्य अभ्यर्थियों को नियोजन से वंचित करने का प्रयास है, जो न्यायोचित नहीं है।”
संघ के केंद्रीय महासचिव अमीन अहमद एवं केंद्रीय प्रवक्ता शहज़ाद अनवर ने कहा कि यदि इस मामले पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संघ आंदोलनात्मक रुख अपनाने के लिए मजबूर होगा।
संघ की सरकार से है मांग
- जैक द्वारा मदरसा बोर्ड के अन्तर्गत अब तक दी गई आलिम एवं फाज़िल की डिग्री की मान्यता सुनिश्चित करे सरकार तथा राज्य सरकार विशेष कैबिनेट बुलाकर राँची विश्वविद्यालय को आलिम एवं फाज़िल परीक्षा संचालित करने और डिग्री जारी करने की स्वीकृति प्रदान करे।
- आलिम एवं फ़ाज़िल की डिग्रियों को झारखण्ड अधिविद्य परिषद द्वारा मान्यता देने वाली 2006 की अधिसूचना का पालन कराया जाए।
- आलिम व फाज़िल डिग्री के मामले पर विधि विभाग और जे० एस० एस० सी० द्वारा की गई गलत व्याख्या को तत्काल वापस लिया जाए।








