HomeAll India Newsशिक्षा मंत्री से मिले पासवा के प्रतिनिधिमंडल, जमीन की बाध्यता ख़त्म करने की मांग की
शिक्षा मंत्री से मिले पासवा के प्रतिनिधिमंडल, जमीन की बाध्यता ख़त्म करने की मांग की


रांची: प्राइवेट स्कूलों के प्रतिनिधि मंडल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद के मार्गदर्शनानुसार शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रयास कर रहे झारखंड में संचालित सभी निजी विद्यालयों को मान्यता लेने में बाधा बन रही है जमीन की बाध्यता को लेकर राज्य में सभी जिला में संचलित निजी विद्यालयों का नेतृत्व कर रहे एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल एकजुटता को दिखाते हुए आज दिनांक 8 मई 2025 को राज्य के शिक्षा मंत्री आदरणीय रामदास सोरेन से उनके निवास स्थान पर मुलाकात कि। और लोगो ने विभिन्न बिंदुओं पर मंत्री महोदय का ध्यान आकृष्ट हेतु मेमोरंडम सौंपा।
- झारखंड राज्य में हजारों हजार ऐसे निजी विद्यालय हैं जो की आरटीई 2019 संशोधन से पहले ही निर्मित हो चुके हैं।
- हजारों विद्यालय आरटीई 2019 संशोधन के पहले से ही जिला शिक्षा विभाग को प्रपत्र1 भरकर जमाकर देते आए हैं।
- आरटीई 2019 संशोधन को निरस्त करते हुए आरटीई 2009 निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम एवं 2011 निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तर्ज पर सभी निजी स्कूलों समय अवधि निर्धारित कर मान्यता दी जाए।
- यू-डाइस प्राप्त विद्यालयों को तत्काल प्रभाव से औपचारिक मान्यता दी जाए एवं 5 वर्ष का समय देते हुए मानक अर्हता पूरी कराई जाए।
- विद्यालय संचालन हेतु शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के लिए जमीन की बाध्यता को समाप्त किया जाए और बच्चों की आवश्यकता अनुसार प्रार्थना सभा, खेल का मैदान,पठन-पाठन के लिए आवश्यक कमरों के आधार पर समय सीमा निर्धारित कर मान्यता देने का कार्य प्रारंभ किया जाए।
- खेल का मैदान एवं अन्य गतिविधियों के लिए कुल भूमि का दो तिहाई भूमि खाली होने के अनिवार्यता के स्थान पर प्रार्थना सभा के लिए जगह होना अनिवार्य किया जाए।
प्रदेश एवं जिला पदाधिकारी मोहम्मद उस्मान,अरविंद कुमार,तौफीक हुसैन,मसूद कच्ची,आलोक विपिन टोप्पो,डॉ बीएनपी बर्णवाल,श्याम सुंदर, प्रवीण मोदी, अंसारुल्लाह,दीपक कुमार इत्यादि ने मौके पर उपस्थित पदाधिकारियों ने मंत्री महोदय का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि अगर झारखंड सरकार जमीन की बाध्यता शिथिल किया जाए और निजी विद्यालयों के मान्यता पर विचार कर राज्य सरकार सहयोग करती है तो प्रत्येक वर्ष झारखंड राज्य में निजी विद्यालयों द्वारा 25% गरीब बच्चों का पठान पाठन नि:शुल्क संभव हो पाएगा जिससे हजारों हजार बच्चे अपने भविष्य को स्वर सकेंगे। शिक्षा का स्तर राज्य में और बढ़ेगी।
तमाम बातों को शिक्षा मंत्री महोदय ने बड़े ही सलीनता से सुनी और सबों को अस्वस्थ कराया और राज्य में संचालित सभी गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय कि सूची व विद्यालय संचालन हेतु संबंधित आवश्यक कागजात उपलब्ध कर जमा करने कि बात कही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस पर विचार करेगी और निजी विद्यालयों को हर संभव सहयोग कर मान्यता देने का काम करेगी।
मौके पर झारखंड राज्य के विभिन्न जिलों से राँची, कोडरमा, देवघर,चतरा, हजारीबाग, जमशेदपुर,बोकारो,धनबाद,गिरिडीह,जामताड़ा,साहिबगंज,पाकुड़,रामगढ़,पतरातु इत्यादि के सैकड़ों विद्यालय संचालक, सदस्य एवं पदाधिकारीगण उपस्थित हुए।

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