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स्वतंत्रता सेनानी भारतीय राष्ट्रवादी अब्दुल रज़्ज़ाक़ अंसारी की जयंती 24 को

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रांची: भारत के स्वतंत्रता सेनानी भारतीय राष्ट्रवादी स्वर्गीय अब्दुल रज़्ज़ाक़ अंसारी की जयंती 24 जनवरी को मनाई जाएगी। उसी दिन दि छोटा नागपुर हैंडलूम एंड खादी वीवर्स को ऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड के प्रांगण में सुबह 9 बजे से कुरान खानी के साथ शुरू होगा। गरीब, असहाय, बुनकर परिवार, मदरसा के बच्चों के बीच कंबल वितरण किया जाएगा। साथ ही चुट्टू पालू में बिरहोर जाति के बीच लंगर चलाया जाएगा। उसके बाद दस बजे मेदांता अस्पताल इरबा और ग्यारह बजे प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में अब्दुल रजाक अंसारी को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। 24 जनवरी 1917 को जन्मे अब्दुल रजाक अंसारी ने अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखी। झारखंड में चिकित्सा, शिक्षा एवं बुनकर उद्योग के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले अब्दुल रजाक अंसारी एक ऐसा नाम है जो आज किसी परिचय का मोहताज नहीं। अब्दुल रजाक अंसारी सामाजिक कार्य और जन सेवा से अपनी पहचान बनाई और फिर राजनीति में कदम रखा। 1964 में पहली बार बिहार विधानसभा परिषद के सदस्य बने 1989 में दोबारा विधानसभा परिषद के सदस्य बने। इस तरह उनकी राजनीति भूमिका मजबूत हुई। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्रा के मंत्रिमंडल में उन्हें हस्तकरघा रेशम और पर्यटन विभाग का कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया। मंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य के हस्तकरघा उद्योग रेशम उत्पादन और पर्यटन को प्रोत्साहन देने की दिशा में अनेकों काम किए। अब्दुल रज़्ज़ाक़ अंसारी पहले व्यक्ति थे जिन्होंने बुनकर होते हुए हस्तकरघा मंत्रालय का पद संभाला। अब्दुल रजाक अंसारी के जलाए दीप को उनके पुत्रों ने आगे बढ़ाने का काम किया। सईद अहमद अंसारी, मंजूर अहमद अंसारी, स्वर्गीय जुबेर अंसारी, इफ्तिखार अहमद अंसारी, और अनवार अहमद अंसारी ने अपने पिता के दिखाए हुए रास्तों पर चलते हुए उनके कार्यों को आगे बढ़ने का काम कर रहे हैं। अनवार अहमद अंसारी ने इस मौके पर कहा के अपने पिता स्वर्गीय अब्दुल रजाक अंसारी के दिखाए हुए रास्ते पर चलते हुए छोटा नागपुर रीजनल हैंडलूम विवर्स कोऑपरेटिव यूनियन के कार्यों को गति देना और बुनकरों को रोजगार से जोड़ना उनकी प्राथमिकता रही है।

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